Bihar Land Acquisition Project: बिहार में सड़क, नेशनल हाईवे (NH), रेलवे और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए होने वाले जमीन अधिग्रहण के कामों में अब किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने साफ कर दिया है कि प्रमंडलीय आयुक्तों से लेकर जिला भू-अर्जन पदाधिकारियों तक, सभी अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी. उन्होंने 349 भू-अर्जन परियोजनाओं की नियमित समीक्षा और एमआइएस (MIS) आधारित ऑनलाइन मॉनिटरिंग के जरिए लंबित मामलों का तुरंत समाधान करने के निर्देश दिए हैं. मंत्री ने यह बातें गुरुवार को विभागीय अधिकारियों के साथ प्रमंडलवार समीक्षा बैठक के दौरान कहीं.
रैयतों को दिए गए 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक
समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ने बताया कि राज्य में कुल 349 विकास परियोजनाओं के लिए अब तक 45,748 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया है. जमीन से प्रभावित हुए रैयतों को मुआवजे के तौर पर 30000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है. उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी राज्य में विकास परियोजनाओं की रफ्तार सीधे तौर पर इस बात पर निर्भर करती है कि वहां जमीन अधिग्रहण का काम कितनी तेजी से हो रहा है.
प्रमंडलवार भूमि और मुआवजे का पूरा आंकड़ा
पटना प्रमंडल: 66 परियोजनाओं के लिए 8023 एकड़ भूमि के अर्जन पर 9502 करोड़ रुपये दिए गए.
तिरहुत प्रमंडल: 91 परियोजनाओं के लिए 12540 एकड़ भूमि पर 6692 करोड़ रुपये मिले.
पूर्णिया प्रमंडल: 46 परियोजनाओं के लिए 6762 एकड़ भूमि पर 3517 करोड़ रुपये जारी हुए.
मगध प्रमंडल: 29 परियोजनाओं के लिए रैयतों को 3534 करोड़ रुपये दिए गए.
सारण प्रमंडल: 21 परियोजनाओं के लिए 1782 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए.
दरभंगा प्रमंडल: 28 परियोजनाओं के लिए 1685 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ.
मुंगेर प्रमंडल: 35 परियोजनाओं के लिए 1409 करोड़ रुपये जारी किए गए.
भागलपुर प्रमंडल: 13 परियोजनाओं के लिए 1049 करोड़ रुपये दिए गए.
कोसी प्रमंडल: 20 परियोजनाओं के लिए 915 करोड़ रुपये रैयतों के भुगतान के लिए मिले.
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हर महीने होगी समीक्षा
मंत्री ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों को निर्देश दिया है कि वे हर महीने अपने स्तर पर भू-अर्जन कार्यों की मासिक समीक्षा बैठक करें. जिला भू-अर्जन अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे हर प्रोजेक्ट की प्रगति की जानकारी को सार्वजनिक करें और एमआइएस (MIS) पोर्टल पर नियमित रूप से डेटा अपडेट करें. राज्य मुख्यालय से अब इन सभी परियोजनाओं की ऑनलाइन निगरानी और ज्यादा सख्ती से की जाएगी. अगर आंकड़ों में किसी भी तरह की गड़बड़ी या काम में लापरवाही पाई गई, तो जिम्मेदार अधिकारियों से तुरंत जवाब-तलब किया जाएगा और उन पर कार्रवाई होगी.
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