Bihar Flood Crisis : 15 जिलों के 48 लाख लोग बाढ़ की चपेट में, हर साल आने वाली आपदा का स्थायी समाधान कब?

Bihar Flood Crisis : बिहार के 15 जिलों में 48 लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं. कई नदियां अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. प्रशासन द्वारा राहत-बचाव कार्य जारी है, लेकिन स्थायी समाधान पर सवाल बना हुआ है.

बिहार के 15 जिलों में 48 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ की चपेट में हैं.हालांकि, राहत की बात यह है कि ज्यादातर नदियों का जलस्तर अब धीरे-धीरे नीचे आने लगा है. इसके बावजूद कई नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. प्रभावित इलाकों में प्रशासन ने निगरानी और राहत-बचाव अभियान जारी रखा है.

15 जिलों के 87 प्रखंडों तक पहुंचा बाढ़ का पानी

  • आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में करीब 48.35 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. बाढ़ का असर 15 जिलों के 87 प्रखंडों और 575 ग्राम पंचायतों तक पहुंचा है. पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय और अररिया में स्थिति ज्यादा गंभीर बताई गई है.
  • लगातार बारिश के बाद नदियों में पानी बढ़ने से कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी. सितंबर में अब तक बिहार में 108.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य बारिश से करीब 20 फीसदी ज्यादा है. हालांकि सवाल ये भी है कि बिहार में हर साल बाढ़ आती क्यों है? इस सवाल का जवाब क्या है जानने के लिए देखिए ये इन्फोग्राफिक...

कई नदियां अब भी खतरे के निशान के ऊपर

  • पानी कम होने के बावजूद नदियों का जलस्तर अभी चिंता का कारण बना हुआ है. कोसी बलतार और कुरसेला में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. बूढ़ी गंडक का जलस्तर खगड़िया में खतरे के निशान से ऊपर है.
  • इसके अलावा गंगा दीघा, गांधी घाट, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव और मुंगेर में खतरे के निशान के ऊपर है. पुनपुन श्रीपालपुर, बागमती बेनीबाद और घाघरा दरौली व गंगपुर सिसवन में भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है.

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सवाल ये भी है कि क्या बिहार में बाढ़ रोकने का कोई तरीका नहीं है? इस सवाल का जवाब क्या है जानने के लिए देखिए ये इन्फोग्राफिक...

राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई से मदद

  • बाढ़ में फंसे लोगों तक खाना और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए राज्य में 1,251 सामुदायिक रसोई चलाई जा रही हैं. इसके साथ ही 13 राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां करीब 12,260 लोगों के ठहरने की व्यवस्था है.
  • लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए करीब 1,790 नावें लगाई गई हैं. बचाव अभियान में एनडीआरएफ की 10 और एसडीआरएफ की 27 टीमें भी तैनात हैं.

पानी घट रहा है, लेकिन अभी राहत नहीं

  • नदियों का जलस्तर कम होना निश्चित तौर पर राहत का संकेत है, लेकिन खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं नदियों की वजह से कई इलाकों में जोखिम बना हुआ है. ऐसे में प्रशासन लगातार जलस्तर पर नजर रख रहा है और प्रभावित क्षेत्रों में राहत-बचाव गतिविधियां जारी हैं.
  • फिलहाल सबसे बड़ी जरूरत यही है कि प्रभावित लोगों तक भोजन, पीने का पानी, दवा, सुरक्षित आवास और जरूरी सामान समय पर पहुंचे. क्योंकि पानी भले घट रहा हो, लेकिन बिहार की बाढ़ की चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है.

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By गौतम कुमार

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