Bihar 5 New Greenfield Expressway: बिहार में आने वाले वर्षों में सड़क से सफर का तरीका काफी बदल सकता है. राज्य में कई बड़े ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट पर निर्माण, जमीन से जुड़ी प्रक्रिया या दूसरी तैयारी चल रही है. इनमें बक्सर-भागलपुर, आमस-दरभंगा, पटना-पूर्णिया, रक्सौल-हल्दिया और गोरखपुर-सिलीगुड़ी जैसे बड़े कॉरिडोर शामिल हैं. हालांकि, इन सभी परियोजनाओं की स्थिति एक जैसी नहीं है. कुछ पर निर्माण चल रहा है, जबकि कुछ अभी मंजूरी, डीपीआर या जमीन अधिग्रहण जैसे चरणों में हैं.
बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस के बारे में जानिए
बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे दक्षिण बिहार के लिए बड़ी परियोजना है. अगस्त 2026 में बिहार कैबिनेट ने 336 किलोमीटर लंबे छह लेन ग्रीनफील्ड और एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे को मंजूरी दी है. इसे PPP यानी निजी भागीदारी वाले मॉडल पर विकसित करने की योजना है. प्रस्तावित रास्ता बक्सर से शुरू होकर भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, गया, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, जमुई और बांका होते हुए भागलपुर तक जाएगा.
इस परियोजना का फायदा सिर्फ दक्षिण बिहार तक सीमित नहीं रहेगा. बक्सर में इसके पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ने की योजना है. इससे बिहार से उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाली सड़क कनेक्टिविटी भी बेहतर हो सकती है.
आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे पर चल रहा निर्माण
आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे बिहार की उन बड़ी परियोजनाओं में है, जिस पर जमीन पर काम चल रहा है. सरकारी दस्तावेजों में इसकी लंबाई करीब 198 किलोमीटर बताई गई है. यह गया के आमस से दरभंगा तक जाता है और NH-119D का हिस्सा है.
यह कॉरिडोर गया, जहानाबाद, पटना, वैशाली, समस्तीपुर और दरभंगा जैसे इलाकों को जोड़ता है. जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार परियोजना का करीब 30 फीसदी काम पूरा होने की जानकारी दी गई थी और दिसंबर 2026 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य बताया गया था.
बोधगया और राजगीर को लिंक रोड से जोड़ने की योजना पर भी चर्चा हुई है. इससे इन प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है.
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे से उत्तर बिहार को फायदा
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे उत्तर बिहार के लिए एक अहम सड़क परियोजना है. लोकसभा में जनवरी 2026 में दिए गए सरकारी दस्तावेज में इसे NE-9 के रूप में दर्ज किया गया है और कॉरिडोर की लंबाई 245 किलोमीटर बताई गई है.
परियोजना के तहत पटना क्षेत्र को उत्तर और पूर्वी बिहार से बेहतर तरीके से जोड़ने की योजना है. इसके रास्ते में वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा और मधेपुरा जैसे इलाके जुड़ेंगे.
परियोजना को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है. इसके तैयार होने के बाद पटना से पूर्णिया की सड़क यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है.
रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे से नेपाल और पोर्ट की कनेक्टिविटी
रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे बिहार के लिए इसलिए खास है क्योंकि यह नेपाल सीमा के पास स्थित रक्सौल को पश्चिम बंगाल के हल्दिया पोर्ट से जोड़ने की योजना है.
लोकसभा के सरकारी दस्तावेज में रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 585 किलोमीटर और बिहार में इसकी लंबाई 408 किलोमीटर बताई गई है.
जनवरी 2026 में केंद्र सरकार ने बिहार में रक्सौल से कटोरिया तक 407.8 किलोमीटर वाले पैकेज के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ी अधिसूचना जारी की थी.
इस सड़क से बिहार को नेपाल सीमा और हल्दिया बंदरगाह के बीच बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है. इससे सामान की आवाजाही और कारोबार को भी फायदा हो सकता है.
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से जुड़ेंगे उत्तर बिहार के जिले
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे उत्तर बिहार के लिए एक और बड़ी परियोजना है. लोकसभा के सरकारी दस्तावेज के अनुसार इसकी कुल लंबाई 526 किलोमीटर बताई गई है. बिहार के कई जिले इसके रास्ते में आएंगे.
प्रस्तावित कॉरिडोर से पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज जैसे जिलों को कनेक्टिविटी मिलने की बात कही गई है.
यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के गोरखपुर को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से जोड़ने वाला बड़ा मार्ग होगा. इससे उत्तर बिहार से बंगाल और पूर्वोत्तर की तरफ सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है. NHAI की परियोजना सूची में गोरखपुर-किशनगंज-सिलीगुड़ी कॉरिडोर भी दर्ज है.
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बिहार को यूपी, बंगाल, झारखंड और नेपाल से जोड़ने की तैयारी
इन बड़े प्रोजेक्टों का नेटवर्क तैयार होने पर बिहार की सड़क कनेक्टिविटी कई दिशाओं में मजबूत हो सकती है. पश्चिम में उत्तर प्रदेश, दक्षिण में झारखंड, पूर्व में पश्चिम बंगाल और उत्तर में नेपाल सीमा की तरफ आने-जाने के लिए नए तेज रास्ते मिलेंगे.
यानी आने वाले वर्षों में बिहार की सड़क व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. हालांकि, अलग-अलग एक्सप्रेसवे की निर्माण स्थिति और पूरी होने की तारीख अलग है, इसलिए सभी परियोजनाओं को एक ही समय पर पूरा होना तय नहीं माना जा सकता.
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