TMBU NAAC Accreditation: भागलपुर. तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) में पिछले छह वर्षों से नैक (NAAC) का पुनर्मूल्यांकन नहीं हो सका है. कई कुलपति आए और गए, लेकिन विश्वविद्यालय की सबसे महत्वपूर्ण अकादमिक प्रक्रिया आज भी अधूरी है. इसका असर केवल विश्वविद्यालय की रैंकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार और यूजीसी से मिलने वाले करोड़ों रुपये के विकास अनुदान, कॉलेजों की आधारभूत सुविधाओं और हजारों छात्रों के भविष्य पर भी पड़ रहा है.
वर्ष 2016 में TMBU का अंतिम नैक मूल्यांकन हुआ था, जिसमें विश्वविद्यालय को 'B' ग्रेड मिला था. यह मान्यता वर्ष 2021 में समाप्त हो गई, लेकिन अब तक दोबारा मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी. ऐसे में विश्वविद्यालय की गुणवत्ता, विकास योजनाओं और राष्ट्रीय स्तर पर उसकी साख को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
NAAC मूल्यांकन क्यों जरूरी है?
राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की शैक्षणिक गुणवत्ता का आकलन करती है. इसकी ग्रेडिंग के आधार पर संस्थानों को यूजीसी और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता और विकास परियोजनाओं का लाभ मिलता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर NAAC मूल्यांकन नहीं होने से विश्वविद्यालय नई परियोजनाओं, शोध अनुदान और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के कई अवसर खो देता है.
स्थायी कुलपति नहीं होने से अटका पूरा प्रोसेस
विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय तक स्थायी कुलपति की नियुक्ति नहीं होने से NAAC की तैयारी प्रभावित हुई. सूत्रों के मुताबिक पूर्व कुलपति प्रो. जवाहर लाल के कार्यकाल में पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन उनके कार्यकाल के बाद यह पूरी तरह ठप पड़ गई.
बताया जाता है कि जिस कमरे में NAAC से संबंधित दस्तावेज और तैयारियां चल रही थीं, वहां बाद में शिक्षकों के प्रमोशन से जुड़े दस्तावेज रख दिए गए और तब से वह कमरा बंद पड़ा है.
AQAR रिपोर्ट भी समय पर नहीं हो सकी अपलोड
विश्वविद्यालय से मिली जानकारी के अनुसार Academic Quality Assurance Report (AQAR) वर्ष 2023-24 तक ही NAAC की वेबसाइट पर अपलोड की गई है. वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट अब तक अपलोड नहीं हो सकी है.
AQAR किसी भी विश्वविद्यालय के लिए NAAC पुनर्मूल्यांकन की दिशा में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है. इसके बिना आगे की प्रक्रिया प्रभावित होती है.
कॉलेजों पर भी पड़ा सीधा असर
NAAC मूल्यांकन का संकट केवल विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है. TMBU के कई अंगीभूत कॉलेज भी इससे प्रभावित हैं.
टीएनबी कॉलेज और मारवाड़ी कॉलेज की NAAC ग्रेडिंग वर्ष 2020 में ही समाप्त हो चुकी है. इसके बाद से इन कॉलेजों को केंद्र सरकार की कई विकास योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है.
इसका असर नई लैब, पुस्तकालय, भवन, स्मार्ट क्लासरूम, हॉस्टल और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं के विकास पर भी पड़ रहा है.
छात्रों की पढ़ाई और सुविधाओं पर असर
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि NAAC मूल्यांकन में लगातार देरी होती रही तो सबसे अधिक नुकसान छात्रों को होगा.
विश्वविद्यालय और कॉलेजों में आधुनिक प्रयोगशालाएं, नई किताबें, डिजिटल संसाधन और शोध सुविधाओं का विस्तार प्रभावित हो सकता है. साथ ही भविष्य में विभिन्न राष्ट्रीय योजनाओं के तहत मिलने वाली सहायता भी सीमित हो सकती है.
विशेषज्ञ बोले- हर पांच साल में होना चाहिए मूल्यांकन
विश्वविद्यालय के पूर्व NAAC समन्वयक प्रो. जगधर मंडल ने बताया कि उनके कार्यकाल में कई वर्षों की AQAR रिपोर्ट अपलोड की गई थी. अब आगे की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की है.
वहीं TMBU के पूर्व प्रभारी कुलपति प्रो. एल.सी. साहा का कहना है कि हर पांच वर्ष पर NAAC मूल्यांकन होना आवश्यक है. इससे विश्वविद्यालय और कॉलेजों को यूजीसी तथा केंद्र सरकार से अनुदान मिलता है और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध होती हैं. उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस दिशा में गंभीर पहल करने की अपील की.
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