टीएमबीयू में संविदा पर चार कर्मियों की बहाली पर घमासान, छात्र संगठन खोल सकते हैं मोर्चा

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में संविदा पर चार कर्मियों की बहाली को लेकर छात्र संगठन गुस्से में हैं. उन्होंने बहाली की प्रक्रिया और नियमों पर सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ छात्र संगठनों ने मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है.

भागलपुर. तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में 29 अगस्त को जारी अधिसूचना के माध्यम से सेंट्रल लाइब्रेरी में संचालित लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस विभाग में संविदा पर चार कर्मियों की बहाली का मामला तूल पकड़ने लगा है. मामले को लेकर विभिन्न छात्र संगठन विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं. छात्र संगठनों ने बहाली की प्रक्रिया और इसके लिए अपनाये गये नियमों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. उनका सवाल है कि लोकभवन और सिंडिकेट की अनुमति के बिना संविदा पर चार कर्मियों की नियुक्ति किस नियम और परिनियम के तहत की गयी.

दो शिक्षक, कार्यालय सहायक और सफाईकर्मी की हुई बहाली

विश्वविद्यालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस विभाग में चार कर्मियों की बहाली की गयी है. इनमें दो शिक्षक, एक कार्यालय सहायक और एक सफाईकर्मी शामिल हैं. नियुक्ति को लेकर अब छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट करने की मांग की है.

छात्रहित के नाम पर अधिकार नहीं तो बहाली कैसे, छात्र संगठनों का सवाल

छात्र राजद के विश्वविद्यालय अध्यक्ष लालू यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय में गड़बड़ी और स्वार्थ पूरा करने के लिए नियमों को दरकिनार कर काम किये जाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि जब छात्र अपनी समस्याओं को लेकर विश्वविद्यालय पहुंचते हैं तो उन्हें बताया जाता है कि प्रभारी कुलपति को अधिकार नहीं है और लोकभवन की अनुमति के बाद ही छात्रहित से जुड़े मामलों का निष्पादन होगा.

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रभारी कुलपति को ऐसे निर्णय लेने का अधिकार नहीं है तो लोकभवन और सिंडिकेट की अनुमति के बिना संविदा पर चार कर्मियों की बहाली कैसे की गयी.

उच्चस्तरीय जांच की मांग

छात्र नेता बमबम प्रीत और आइसा के प्रदेश सह सचिव प्रवीण कुशवाहा ने पूरे मामले की लोकभवन स्तर से उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि यदि बहाली में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए.

वहीं एबीवीपी के वरीय छात्र नेता कुणाल पांडे ने बयान जारी कर प्रभारी कुलपति को तत्काल हटाने की मांग की. उन्होंने बहाली की अधिसूचना रद्द करने की मांग करते हुए टीएमबीयू में हाल में हुई नियुक्तियों और पूर्व में लिये गये विवादित निर्णयों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की.

प्रभारी कुलपति के नीतिगत फैसलों पर राजभवन ने लगा रखी है रोक

मामले में राजभवन के पूर्व निर्देशों का भी हवाला दिया जा रहा है. राज्यपाल सचिवालय के सचिव गोपाल मीणा ने 29 अप्रैल 2026 को टीएमबीयू समेत राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और कार्यवाहक कुलपतियों को पत्र जारी किया था. इसमें कार्यवाहक या प्रभारी कुलपति को नीतिगत निर्णय लेने से रोकने की बात कही गयी थी.

निर्देश के अनुसार प्रभारी या कार्यवाहक कुलपति विश्वविद्यालय के नियमित रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्य कर सकते हैं, लेकिन नीतिगत निर्णय नहीं ले सकते. चयन समिति या प्रोन्नति समिति की बैठक बुलाने और उसकी अध्यक्षता करने के साथ सीनेट, सिंडिकेट और एकेडमिक काउंसिल की बैठक बुलाने पर भी रोक का उल्लेख किया गया था.

नयी नियुक्ति और भर्ती प्रक्रिया भी नीतिगत निर्णय के दायरे में

राज्यपाल सचिवालय के निर्देश में नयी नियुक्ति और भर्ती प्रक्रिया शुरू करना भी नीतिगत निर्णय के दायरे में रखा गया है. इसके अलावा शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के स्थानांतरण, प्रतिनियुक्ति और पदस्थापन से जुड़े निर्णयों को भी नीतिगत माना गया है.

निर्देश में वित्तीय प्रभाव वाले फैसले, नये निर्माण कार्य शुरू करना, नये टेंडर जारी करना तथा पदों या कार्यालयों का सृजन, समाप्ति या उन्नयन जैसे मामलों को भी प्रभारी कुलपति के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखा गया है.

अपरिहार्य निर्णय के लिए कुलाधिपति की पूर्व अनुमति जरूरी

राजभवन के निर्देश में कहा गया था कि विश्वविद्यालय के हित में यदि कोई नीतिगत निर्णय लेना अपरिहार्य हो तो आदेश जारी करने से पहले कुलाधिपति की पूर्व अनुमति लेना जरूरी होगा. सभी विश्वविद्यालयों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया था.

ऐसे में टीएमबीयू में 29 अगस्त को जारी संविदा बहाली की अधिसूचना को लेकर छात्र संगठनों ने अब इसी निर्देश के संदर्भ में सवाल उठाये हैं. मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी.

बहाली को लेकर बढ़ सकता है आंदोलन

चार संविदा कर्मियों की बहाली का मामला सामने आने के बाद छात्र संगठनों की सक्रियता बढ़ गयी है. संगठनों ने जांच और अधिसूचना रद्द करने की मांग की है. अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है और बहाली की प्रक्रिया को लेकर आगे क्या कदम उठाये जाते हैं.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By आरफीन जुबैर

आरफीन जुबैर प्रिंट माध्यम में पिछले 16 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा और खेल में रुचि रखते हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >