bhagalpur news. कहलगांव में तीन पहाड़ी का होगा पर्यटन विकास, रोप-वे और लक्ष्मण झूला निर्माण पर मांगी गयी रिपोर्ट

कहलगांव में होगा पर्यटन का विकास.

—कहलगांव विधायक के प्रस्ताव पर पर्यटन सचिव ने भेजा पत्र, राजस्व शाखा रिपोर्ट कर रही तैयारकहलगांव में गंगा नदी के बीच स्थित तीन पहाड़ी के पर्यटन विकास को लेकर जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है. तीन पहाड़ी पर रोप-वे और लक्ष्मण झूला का निर्माण किया जायेगा. कहलगांव विधायक ईं शुभानंद मुकेश के प्रस्ताव पर बिहार सरकार के पर्यटन विभाग के विशेष सचिव ने जिला प्रशासन को पत्र भेज कर तीन पहाड़ी की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. इस संबंध में जिला सामान्य शाखा के प्रभारी पदाधिकारी ने राजस्व के अपर समाहर्ता व कहलगांव एसडीओ को पत्र भेजकर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है.जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों से भूमि स्वामित्व की स्थिति की जांच कर पूर्ण विवरणी, नक्शा, अनापत्ति प्रमाणपत्र व निर्माण के बाद रखरखाव की व्यवस्था सहित पर्यटकीय संभावनाओं पर स्पष्ट मंतव्य मांगा है. निर्देश दिया गया है कि भेजे गये फॉर्मेट में विस्तृत रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध कराया जाये, ताकि ससमय इसे विभाग को प्रेषित किया जा सके. गंगा नदी के बीच स्थित ये तीनों पहाड़ियां प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर हैं और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. रोप-वे व लक्ष्मण झूला निर्माण होने से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होने की संभावना है.

गंगा की लहरों के बीच पहाड़ों को तराश कर बना था ””””रॉक कट टेंपल””””

कहलगांव में गंगा की धारा के बीच तीन पहाड़ी (रॉक कट टेंपल) स्थित है. यहां पहाड़ों को तराश कर मंदिर बनाया गया था. इस ऐतिहासिक स्थल को सुरक्षित घोषित करने और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए राज्य सरकार की ओर से प्रयास शुरू कर दिया गया है. इसके लिए जिला प्रशासन सर्वे का काम पूरा कर चुका है. इतिहासकारों ने इसे रॉक कट टेंपल कहा है. इसके चारों तरफ से इसे छूते हुए गंगा की धारा बहती है.

यहां हैं अलग-अलग ऋषि-मुनियों के आश्रम

तीनों पहाड़ी पर तीन अलग-अलग ऋषि-मुनियों के आश्रम हैं. नानकशाही आश्रम, तापस आश्रम व बुद्धा आश्रम के नाम से यह इतिहास में उल्लेखित है. स्थानीय लोग इसे पहाड़ी शांति बाबा, बंगाली बाबा व पंजाबी बाबा पहाड़ी के नाम से पुकारते हैं. पंजाबी बाबा पहाड़ी आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआइ) के अधीन है. ऐसा माना गया है कि पाल वंश काल (आठवीं से 12वीं शताब्दी) में इसका निर्माण हुआ था. इतिहासकार यह भी कहते हैं कि यहां जाह्नवी ऋषि का आश्रम हुआ करता था. ये पहाड़ियां ऋषि-मुनियों की तपस्थली रही होगी. प्राचीन पुरातत्व अवशेष एवं कलानिधि अधिनियम 1976 के अंतर्गत बिहार सरकार द्वारा अधिसूचित कर संरक्षित घोषित किया जाएगा. इसकी प्रक्रिया चल रही है.

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