bhagalpur news. भागलपुर हवाई अड्डा को लेकर सिविल विमानन विभाग ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट

लंबे समय से उपेक्षित पड़े भागलपुर शहर स्थित हवाई अड्डा के विकास को लेकर प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गयी है.

लंबे समय से उपेक्षित पड़े भागलपुर शहर स्थित हवाई अड्डा के विकास को लेकर प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गयी है. सिविल विमानन विभाग के सचिव डॉ निलेश रामचंद्र देवरे ने डीएम को पत्र भेजकर हवाई अड्डा स्थल के निरीक्षण और पूर्व व्यवहार्यता अध्ययन से पहले आवश्यक रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि विकास की दिशा में आगे बढ़ने से पहले सभी तकनीकी और भौगोलिक पहलुओं का परीक्षण जरूरी है. पत्र में प्रस्तावित साइट के निर्देशांक डब्ल्यूजीएस-84 प्रणाली के अनुसार उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है. साथ ही राजस्व मानचित्र, जिसमें खेसरा संख्या स्पष्ट रूप से अंकित होने की भी मांग की गयी है. सात बिंदुओं पर मांगी गयी विस्तृत रिपोर्ट विभाग की ओर से प्रस्तावित स्थल के समग्र ज्यामितीय आकार और आयामों को दर्शाने वाला रेखाचित्र भी उपलब्ध कराने को कहा गया है. इसके अतिरिक्त भारतीय सर्वेक्षण विभाग का मानचित्र, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग से पिछले 10 वर्षों का मौसम संबंधी डेटा आदि प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है. कुल सात प्रकार की तकनीकी और प्रशासनिक रिपोर्ट मांगी गयी है. माना जा रहा है कि इन दस्तावेजों के आधार पर हवाई अड्डा के विकास की व्यवहार्यता और संभावनाओं का आकलन किया जायेगा. प्रभात नॉलेज डब्ल्यूजीएस-84 क्या है ? डब्ल्यूजीएस-84 (वर्ल्ड जीयोडेटिक सिस्टम – 1984) एक वैश्विक भू-स्थानिक संदर्भ प्रणाली है, जिसका उपयोग पूरी पृथ्वी पर सटीक स्थान (अक्षांश, देशांतर और ऊंचाई) निर्धारित करने के लिए किया जाता है. यह जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम), मानचित्रण, ड्रोन और नेविगेशन में प्रयुक्त मानक (स्टैंडर्ड) है, जो पृथ्वी के केंद्र पर स्थित है. इसे 1984 में विकसित किया गया था. इससे स्थान की जानकारी सटीक होती है, जो आजकल अधिकांश आधुनिक डिजिटल नेविगेशन सिस्टम में उपयोग होती है.

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By NISHI RANJAN THAKUR

NISHI RANJAN THAKUR is a contributor at Prabhat Khabar.

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