Ganga Erosion News : राघोपुर में गंगा नदी के तेज कटाव ने एक बार फिर प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. लगभग 125 से 150 मीटर क्षेत्र में हुए भीषण कटाव के कारण जल संसाधन विभाग का कैंप कार्यालय भी नदी में समा गया. हालात को देखते हुए मुख्य अभियंता स्वयं मौके पर कैंप कर रहे हैं और कटाव रोकने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है.
रातों-रात गंगा ने मचाई भारी तबाही
राघोपुर में बीती रात गंगा नदी ने अचानक अपना रौद्र रूप दिखाते हुए लगभग 125 से 150 मीटर क्षेत्र में भीषण कटाव कर दिया. कटाव की चपेट में आकर जल संसाधन विभाग का कैंप कार्यालय भी गंगा में समा गया. घटना के बाद विभागीय अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया.
मुख्य अभियंता ने संभाली कमान, मौके पर डाला डेरा
कटाव की सूचना मिलते ही जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता ई. जयप्रकाश पासवान स्वयं राघोपुर पहुंचे और वहीं कैंप कर स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं. विभाग ने बौंसी प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता के साथ दो सहायक अभियंता और तीन कनीय अभियंताओं को भी तत्काल मौके पर भेजा है, ताकि राहत एवं कटाव निरोधी कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए.
युद्धस्तर पर चल रहा फ्लड फाइटिंग अभियान
कटाव को रोकने के लिए विभाग ने युद्धस्तर पर फ्लड फाइटिंग अभियान शुरू कर दिया है. आधा दर्जन से अधिक ठेकेदारों और उनकी टीमों को राहत एवं बचाव कार्य में लगाया गया है. बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता ई. गौतम कुमार ने बताया कि क्षतिग्रस्त हिस्से के रीस्टोरेशन का कार्य तेजी से कराया जा रहा है. इसके लिए बालू से भरी बोरियों को एनसी में डालकर लगाया जा रहा है. साथ ही हाथी पांव और बैंबू राफ्ट जैसी तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है.
वार्निंग लेवल से नीचे है गंगा का जलस्तर
विभाग के अनुसार गंगा नदी का जलस्तर फिलहाल वार्निंग लेवल से नीचे है, जिससे कटाव निरोधी कार्य में तेजी लाई जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्र की लगातार निगरानी की जा रही है और हालात के अनुसार हर आवश्यक कदम तत्काल उठाए जा रहे हैं, ताकि तटबंध को सुरक्षित रखा जा सके.
पिछले साल भी हुआ था बड़ा कटाव, अब स्थायी समाधान की मांग
गौरतलब है कि पिछले वर्ष इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध पर भी गंगा नदी ने भीषण कटाव किया था, जिसे करोड़ों रुपये की लागत से आपातकालीन कार्य कर सुरक्षित किया गया था. राघोपुर में एक बार फिर उत्पन्न हुए खतरे को देखते हुए विभाग पूरी ताकत के साथ कटाव रोकने में जुटा है. वहीं स्थानीय लोग भी हालात पर नजर बनाए हुए हैं और प्रशासन से स्थायी कटाव निरोधी व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं.
