bhagalpur news. ...इज्जत ते फेर नहिये मिलथों जिनगी भर ससुरारी में

कला, संस्कृति विभाग व जिला प्रशासन की ओर से मंजूषा महोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार को सैंडिस कंपाउंड स्थित ओपन एयर थिएटर में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ.

मंजूषा महोत्सव के दूसरे दिन कवि सम्मेलन का आयोजन

कला, संस्कृति विभाग व जिला प्रशासन की ओर से मंजूषा महोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार को सैंडिस कंपाउंड स्थित ओपन एयर थिएटर में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ. कार्यक्रम का उद्घाटन कवियों ने दीप प्रज्वलित कर किया. युवा उद्घोषक गौरव कुमार ने कवि सम्मेलन का संचालन करते हुए सबसे पहले डॉ मंजीत सिंह किनवार को आमंत्रित किया. उन्होंने सरस्वती वंदना के साथ एक से बढ़कर एक हिंदी और अंगिका की रचना प्रस्तुत की. कोर कसर जों रही गेल्हों नौकरी के तैयारी में, इज्जत ते फेर नहिये मिलथों जिनगी भर ससुरारी में…प्रस्तुत कर श्रोताओं का मन मोह लिया. प्रेमचंद पांडे ने हिंदी और भोजपुरी की एक से बढ़कर एक रचना से युवाओं को गुदगुदाया. सुधीर कुमार प्रोग्रामर के माइक पर आते ही श्रोताओं ने तालिया के गड़गड़ाहट से स्वागत किया. उनका अंगिका गीत देखलौं बहार ऐंगना घुंमी-घुंमी, गाबै हमरो बिहार हो झूमी-झूमी… की हरेक पंक्ति पर तालियों का साथ मिलता रहा. इसी कड़ी में चर्चित गजलकार डॉ विकास सोलंकी ने काफी सधे हुए अंदाज में कई मुक्तक प्रस्तुत किये, सारा हिसाब दे दूं क्या, उनको किताब दे दूं क्या? जैसी रचना श्रोताओं के दिन में जगह बना ली. जिला के कई वरीय पदाधिकारी भी कार्यक्रम का आनंद लिये. इस मौके पर जिला कला संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन भी मौजूद थे.

—————–कवियों ने इसे भी गायामेहनत सें टूटते दरद के पहाड़ हो, रसे रसे फूनगी पर चढ़तय अपनों बिहार हो : सुधीर कुमार प्रोग्रामर

सब कुछ जी का जंजाल हुआ यह देखो कैसा हाल हुआ, बस जॉब जाॅब के चक्कर में काला से उजला बाल हुआ : डॉ मनजीत सिंह किनवार

आंख में जिनके नहीं थोड़ी बहुत भी रोशनी, आंख वालों को वही अब रोशनी दिखला रहे हैं : डॉ प्रेमचंद पाण्डेयमहलों में हों या फिर झोपड़ी में, दीपक सा हम भी जलते रहे हैं : डॉ विकास सोलंकी—————————–सूफी बैंड की प्रस्तुति ने हर लिया मनमंजूषा महोत्सव में भागलपुर के सूफी बैंड ने एक से बढ़ कर एक प्रस्तुति दी, जिसने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया. एक बार जो रघुवर की नजरों का इशारा मिल जाये…, सांसों की माला पे, सिमरुं मैं पी का नाम…, तू माने या ना माने दिलदारा… जैसी कई अन्य गीतों की प्रस्तुति दी. इसमें गजेंद्र मिश्रा व आदिल खान ने गीत गाकर ने माहौल को सूफियाना कर दिया. तबले पर तबला गुरु अनुमेह मिश्रा, बैंजो पर बादल व ढोलक पर अभय मिश्रा ने संगत किया.

————————बिहुला-विषहरी नाटक के कलाकारों ने जीत लिया दिलफोटो : सिटी में बिहुला-विषहरी नाम सेमंजूषा महोत्सव में भागलपुर की प्रसिद्ध नाट्य संस्था कृष्णा क्लब की ओर से अंग जनपद की लोक धरोहर पर आधारित बिहुला-विषहरी नाटक का मंचन किया गया. यह नाटक मंजूषा कला की लोकगाथा पर आधारित है, जिसे दर्शकों ने काफी सराहा. कलाकारों के सशक्त अभिनय और प्रभावशाली प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. चांदो सौदागर की भूमिका निभाष चंद्र मोदी ने निभायी, जबकि भगवान शिव का अभिनय अजय अटल ने किया. मां मनसा की भूमिका में संजना कुमारी, बिहुला के रूप में माधवी चौधरी और सोनिका की भूमिका में राधिका ने शानदार अभिनय किया. डोम की भूमिका में शीतांशु अरुण ने भी दर्शकों का खूब मनोरंजन किया. नाटक में पूर्णिमा, पिट्टू, आस्था, प्रिया सिंह, साक्षी, श्रुति और प्रवीण प्रकाश सहित अन्य कलाकारों ने भी अपनी अभिनय क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं. यह आयोजन एक दिन पहले सोमवार को को किया गया था.

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By NISHI RANJAN THAKUR

NISHI RANJAN THAKUR is a contributor at Prabhat Khabar.

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