मंगलवार की सुबह से शुरू हुई झमाझम बारिश के बाद किसान युद्धस्तर पर धान की खेती में जुट गए हैं. जो किसान अब तक पानी के अभाव में बिचड़ा (बीज) नहीं डाल सके थे, वे तेजी से खेतों को तैयार कर रहे हैं, वहीं बिचड़ा तैयार कर चुके किसान धान की रोपनी में लग गए हैं. मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी बारिश की संभावना जताई है, जिससे इस महीने शुरू होने वाले विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला के कांवरियों को भी भीषण गर्मी से राहत मिलेगी.
खेतों में लौटी रौनक, रोपनी और बुवाई के काम में आई तेजी
लगातार हो रही इस मानसूनी बारिश से कृषि क्षेत्र में गतिविधियां अचानक तेज हो गई हैं:
- बिचड़ा डालने में तेजी: सिंचाई के साधनों की कमी से जूझ रहे किसान, जो अब तक धान की बुवाई नहीं कर पाए थे, वे इस प्राकृतिक वर्षा का लाभ उठाकर खेतों में बीज गिरा रहे हैं.
- रोपनी शुरू: जिन किसानों के पास पहले से बिचड़ा तैयार था, उन्होंने खेतों की जुताई कर धान के पौधों की रोपाई (रोपनी) शुरू कर दी है.
कृषि वैज्ञानिकों की सलाह: कम समय में तैयार होने वाले बीजों का करें चयन
बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर के मौसम विभाग ने आगामी दिनों को लेकर पूर्वानुमान जारी किया है:
- बारिश की संभावना: मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, क्षेत्र में अभी मानसूनी सिस्टम सक्रिय रहेगा और आने वाले दिनों में भी अच्छी बारिश दर्ज की जाएगी.
- विशेष सलाह: मौसम विभाग ने किसानों को सुझाव दिया है कि वे अब लंबी अवधि वाली फसलों के बजाय कम समय (कम अवधि) में तैयार होने वाली धान की किस्मों के बीजों को ही अपने खेतों में प्राथमिकता दें, ताकि पैदावार प्रभावित न हो.
श्रावणी मेला के कांवरियों को मिलेगी तपिश से राहत
इस मानसूनी बारिश का सीधा लाभ केवल किसानों को ही नहीं, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी मिलेगा. इसी महीने से सुल्तानगंज से शुरू होने वाले ऐतिहासिक श्रावणी मेला को लेकर कांवरियों में भारी उत्साह है. लगातार हो रही बारिश और ठंडी हवाओं के कारण मौसम सुहावना हो गया है, जिससे सुल्तानगंज से देवघर (बाबाधाम) की कठिन पैदल यात्रा तय करने वाले शिवभक्तों को उमस और भीषण गर्मी से भारी राहत मिलेगी.
