भागलपुर. टीएमबीयू द्वारा जेपी कॉलेज नारायणपुर के प्राचार्य प्रो. इमरान खान को निलंबित करने के आदेश पर लोकभवन ने आपत्ति जतायी है. लोकभवन सचिवालय के अपर सचिव संजय कुमार ने टीएमबीयू के प्रभारी कुलपति को पत्र भेजकर निलंबन से संबंधित अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से रिवर्स करने का निर्देश दिया है. पत्र में विश्वविद्यालय की ओर से अपनायी गयी कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि ऐसे मामले में कुलाधिपति की पूर्व अनुमति आवश्यक थी.
प्रभारी कुलपति के अतिरिक्त प्रभार का भी पत्र में उल्लेख
लोकभवन की ओर से भेजे गये पत्र में कहा गया है कि प्रभारी कुलपति टीएमबीयू के अतिरिक्त प्रभार में हैं. राजभवन ने विश्वविद्यालय की ओर से की गयी पूरी कार्रवाई पर गंभीरता से विचार करने के बाद संबंधित अधिसूचना को रिवर्स करने का निर्देश दिया है.
इस निर्देश के बाद अब विश्वविद्यालय प्रशासन को प्राचार्य के निलंबन से संबंधित अधिसूचना वापस लेने की कार्रवाई करनी होगी.
जांच रिपोर्ट के बाद जारी किया गया था कारण बताओ नोटिस
लोकभवन के पत्र में विश्वविद्यालय की अधिसूचना संख्या और नौ जुलाई 2026 की कार्रवाई का उल्लेख किया गया है. पत्र के अनुसार दो जून 2026 को गठित जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय को सौंपी थी. इसके बाद तीन जुलाई को जेपी कॉलेज नारायणपुर के प्राचार्य प्रो. इमरान खान को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था.
विश्वविद्यालय प्रशासन उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ. इसके बाद प्राचार्य को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया गया था.
बिना पूर्व अनुमति निलंबन पर उठाया सवाल
लोकभवन ने विश्वविद्यालय की कार्रवाई में अपनायी गयी प्रक्रिया को लेकर मुख्य आपत्ति जतायी है. पत्र में कहा गया है कि कॉलेज के प्राचार्य को निलंबित करने जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय से पहले कुलाधिपति की पूर्व अनुमति लेना आवश्यक था.
इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पहले निलंबन की कार्रवाई की गयी और बाद में कुलाधिपति से पोस्ट फैक्टो अप्रूवल यानी कार्रवाई के बाद अनुमोदन मांगा गया.
निलंबन अवधि में एमएएम कॉलेज बनाया गया था मुख्यालय
टीएमबीयू की ओर से जारी निलंबन संबंधी अधिसूचना में निलंबन अवधि के दौरान प्रो. इमरान खान का मुख्यालय एमएएम कॉलेज नवगछिया निर्धारित किया गया था. अब लोकभवन के निर्देश के बाद निलंबन आदेश और उससे जुड़ी प्रशासनिक कार्रवाई को वापस लेने की प्रक्रिया विश्वविद्यालय स्तर पर शुरू होने की उम्मीद है.
विश्वविद्यालय की प्रक्रिया पर खड़े हुए गंभीर सवाल
लोकभवन के निर्देश के बाद अब विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अपनायी गयी प्रक्रिया चर्चा में है. सवाल उठ रहा है कि जब निलंबन जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक थी, तो विश्वविद्यालय ने पहले कार्रवाई कर बाद में अनुमोदन लेने की प्रक्रिया क्यों अपनायी. अब निगाह इस बात पर है कि टीएमबीयू लोकभवन के निर्देश के बाद निलंबन संबंधी अधिसूचना को किस तरह रिवर्स करता है और आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया क्या अपनायी जाती है.
