भागलपुर जिले के गोपालपुर प्रखंड अंतर्गत राघोपुर में गंगा नदी का रौद्र रूप अब विकराल तबाही का संकेत दे रहा है. विडंबना यह है कि हर साल बाढ़ और कटाव से बचाव के नाम पर सरकारी खजाने से लाखों-करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जाते रहे, लेकिन गंगा की धारा को बांध से दूर रखने के सारे उपाय नाकाम साबित हुए. कभी तटबंध से सैकड़ों मीटर दूर बहने वाली गंगा ने अपनी मुख्य धारा बदल ली है और अब वह सीधे पुरानी रेलवे लाइन के बिल्कुल करीब पहुंच चुकी है. राघोपुर-काजीकोरैया जमींदारी तटबंध का 350 मीटर हिस्सा पहले ही नदी के आगोश में समा चुका है, जिससे समूचे इलाके में भारी जलप्रलय का गंभीर खतरा पैदा हो गया है.
500 मीटर दूर बहने वाली धारा अब तटबंध के सीने पर
जल संसाधन विभाग के तकनीकी आंकड़ों के मुताबिक कुछ समय पहले तक गंगा की मुख्य और गहरी धारा राघोपुर बांध से करीब 500 मीटर की सुरक्षित दूरी पर बह रही थी. अब करीब 35 से 40 मीटर गहरी मुख्य जलधारा तटबंध के ठीक मुहाने पर आकर टकरा रही है. नदी का बहाव इतना प्रचंड है कि वह नीचे से तलहटी की मिट्टी काट रही है, जिसके चलते ऊपर से डाली जाने वाली बोल्डर और सुरक्षा सामग्री सीधे अथाह गहराई में विलीन हो जा रही है.
जमींदारी बांध का 350 मीटर हिस्सा विलीन, रेलवे ट्रैक पर संकट
कटाव की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राघोपुर-काजीकोरैया जमींदारी तटबंध का लगभग 350 मीटर हिस्सा कटकर गंगा में समा चुका है. इस बांध के कटने से पुरानी रेलवे लाइन अब सीधे कटाव के निशाने पर आ गई है. यदि नदी का यही रुख रहा तो रेलवे ट्रैक के क्षतिग्रस्त होने के साथ-साथ दर्जनों घनी आबादी वाले गांवों में भीषण तबाही मच सकती है.
बड़े जहाजों और स्टीमर से युद्धस्तर पर फ्लड फाइटिंग
मौजूदा नाजुक हालात को संभालने के लिए जल संसाधन विभाग, पथ निर्माण विभाग, आरसीडी और नेशनल हाईवे से जुड़े तमाम इंजीनियरों की टीम मौके पर कैंप कर रही है. तेज धारा के दबाव को रोकने के लिए बड़े मालवाहक जहाजों और स्टीमर के जरिए मेगा जियो बैग कटाव स्थल तक पहुंचाए जा रहे हैं. नदी के किनारे सैंड बैग, जियो बैग, मेगा जियो बैग और मजबूत बांस के स्ट्रक्चर (पर्क्यूपाइन) डालकर नदी के वेग को मोड़ने की पुरजोर कोशिश की जा रही है.
मुख्यमंत्री ने लिया जायजा, ड्रेजिंग से स्थायी समाधान की तैयारी
राघोपुर में कटाव के गंभीर संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री ने स्वयं कटाव स्थल का स्थलीय निरीक्षण किया. उन्होंने अधिकारियों को बचाव कार्य में ढिलाई न बरतने और सबसे संवेदनशील हिस्सों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित करने की सख्त हिदायत दी. तात्कालिक राहत के लिए दिन-रात फ्लड फाइटिंग जारी है, जबकि जल संसाधन विभाग अब मानसून के बाद नदी की पुरानी मूल धारा को सक्रिय करने के लिए ड्रेजिंग कराने और स्थायी बोल्डर पिचिंग कार्य की विस्तृत योजना पर काम कर रहा है.
