Bhagalpur News: भागलपुर में महात्मा गांधी के ऐतिहासिक आगमन के 100 वर्ष पूरे होने पर शुक्रवार से शुरू हुआ तीन दिवसीय समारोह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि गांधी के विचारों को वर्तमान समाज से जोड़ने का एक गंभीर प्रयास बन गया. लालकोठी स्थित श्वेतांबर जैन धर्मशाला परिसर में आयोजित इस समारोह में देशभर से आए गांधीवादी चिंतकों, साहित्यकारों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया.
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि गांधीवादी चिंतक एवं साहित्यकार डॉ. पुरुषोत्तम अग्रवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि "गांधी मजबूरी नहीं, मजबूती का नाम हैं. वे हमेशा राष्ट्रपिता के रूप में भारतीय समाज की नैतिक शक्ति के प्रतीक रहे हैं और आगे भी रहेंगे."
गांधी के विचारों की शक्ति पर जोर
ग्वालियर से आए डॉ. पुरुषोत्तम अग्रवाल ने अपने व्याख्यान में कहा कि महात्मा गांधी ने अहिंसा, सत्य और नैतिक साहस के बल पर भारतीय जनमानस को एकजुट किया.
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने गांधी को मजबूरी का प्रतीक बताने की कोशिश की, लेकिन इतिहास गवाह है कि गांधी अपने विचारों और जनांदोलन की ताकत से लाखों लोगों को प्रेरित करने में सफल रहे.
उनके अनुसार गांधी का सबसे बड़ा योगदान यह था कि उन्होंने आम भारतीय को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का सक्रिय सहभागी बनाया.
हिंसक संघर्ष का समाधान गांधी के रास्ते में
समारोह में मौजूद भागलपुर सांसद अजय मंडल ने दुनिया के विभिन्न देशों में बढ़ते हिंसक संघर्षों पर चिंता जताई.
उन्होंने कहा कि आज जब समाज और विश्व दोनों स्तर पर टकराव की स्थितियां बढ़ रही हैं, तब गांधी के विचार पहले से अधिक प्रासंगिक हो गए हैं.
उनका मानना है कि संवाद, अहिंसा और सामाजिक न्याय के गांधीवादी सिद्धांत ही स्थायी शांति का आधार बन सकते हैं.
"गांधी वास्तविक हीरो थे"
डॉ. सुजाता चौधरी ने महात्मा गांधी को वास्तविक हीरो बताते हुए कहा कि वे सम्मान और अपमान दोनों परिस्थितियों में समभाव बनाए रखते थे.
उन्होंने कहा कि गांधी का व्यक्तित्व केवल राजनीतिक नेतृत्व तक सीमित नहीं था, बल्कि वे सामाजिक, नैतिक और आध्यात्मिक चेतना के भी मार्गदर्शक थे.
चरखा चलाकर हुआ समारोह का उद्घाटन
समारोह का उद्घाटन चरखा चलाकर और दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया, जिससे गांधी के स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के संदेश को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया.
इस अवसर पर डॉ. मनोज कुमार के नेतृत्व में संपादित स्मारिका तथा डॉ. मनोज मीता द्वारा रचित "गांधी ज्ञान कोश" का लोकार्पण भी किया गया.
आयोजकों ने बताया कि स्मारिका में देशभर के विद्वानों और शोधार्थियों के गांधी केंद्रित महत्वपूर्ण और शोधपरक लेख शामिल किए गए हैं.
भागलपुर में गांधी के चार ऐतिहासिक आगमन पर विमर्श
वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत ने बताया कि समारोह के दौरान महात्मा गांधी के भागलपुर में चार बार हुए ऐतिहासिक आगमन के उद्देश्य और उसकी वर्तमान प्रासंगिकता पर विस्तृत चर्चा की गई.
इस विमर्श में विभिन्न विश्वविद्यालयों, सामाजिक संगठनों और गांधीवादी संस्थानों से जुड़े विद्वानों ने भाग लिया.
उद्घाटन सत्र स्वाधीनता सेनानी दीप नारायण सिंह को समर्पित रहा.
लोक गायिका चंदन तिवारी ने बांधा समां
समारोह के दूसरे सत्र में लोक गायिका चंदन तिवारी ने गांधी पर आधारित लोकगीतों की प्रस्तुति दी.
उन्होंने बताया कि जब गांधी बिहार आते थे, तब महिलाएं कजरी, झूमर और अन्य लोकधुनों के माध्यम से उनका स्वागत करती थीं.
कार्यक्रम की शुरुआत "वैष्णव जन तो तेने कहिए" से हुई, जिसने पूरे वातावरण को गांधीमय बना दिया.
यह सत्र शहीद महेंद्र गोप और सतीश प्रसाद झा को समर्पित था.
दूसरे दिन होगा राष्ट्रीय कवि सम्मेलन
आयोजकों के अनुसार समारोह के दूसरे दिन राष्ट्रीय कवि सम्मेलन आयोजित किया जाएगा.
इसमें मुख्य अतिथि के रूप में बिहार के पथ निर्माण मंत्री ई. शैलेन्द्र कुमार शामिल होंगे.
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता लक्ष्मी शंकर वाजपेई करेंगे, जबकि ममता किरण, अनिरुद्ध सिन्हा, अनुराधा प्रसाद, अविनाश बंधु, संतोष सिंह और राजमणि मिश्र सहित कई कवि गांधी केंद्रित कविताओं का पाठ करेंगे.
इसी दिन स्वाधीनता सेनानी शुभकरण चूड़ीवाला को समर्पित शांति सद्भावना यात्रा, किसान सम्मेलन और युवा सम्मेलन भी आयोजित किए जाएंगे.
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