bhagalpur news. पांच बड़ी परियोजनाएं भूमि अधिग्रहण नहीं होेने से अटकी है, विभाग पर एक और भार

भूमि अधिग्रहण नहीं होने से पांच परियोजनाएं अटकी.

-भोलानाथ आरओबी के लिए भी जमीन अधिग्रहण लंबित है, जबकि हंसडीहा फोरलेन परियोजना का बार-बार रद्द होता रहा टेंडरजिले की पांच बड़ी परियोजनाओं में से एक के लिए भी अब तक भू-अर्जन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है. वहीं, विभाग पर एक और बड़े प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण का अतिरिक्त भार बढ़ गया है. कई योजनाओं पर विभाग वर्षों से काम कर रहा है, लेकिन भूमि अधिग्रहण समय पर न होने के कारण इन प्रोजेक्टों की प्रगति लगातार बाधित है. इस संबंध में भूअर्जन पदाधिकारी राकेश कुमार से बात करने की कोशिश की गयी तो फोन रिसीव नहीं किया गया.

पांच प्रमुख प्रोजेक्टों में लंबित भू-अर्जन

भू-अर्जन विभाग के पास वर्तमान में जिन योजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की जिम्मेदारी है, उनमें एक बस स्टैंड, एक आरओबी और तीन सड़क शामिल हैं. सभी भागलपुर सीमा क्षेत्र में है.

-भोलानाथ पुल आरओबी

-गोराडीह अंतरराज्यीय बस स्टैंड

-एकचारी–महगामा फोरलेन सड़क

-भागलपुर–अगरपुर–कोतवाली सड़क

-भागलपुर–हंसडीहा फोरलेन सड़क

एक और नया दायित्व-मरीन ड्राइव के लिए भूमि अधिग्रहण

विभाग को अब मुंगेर से सबौर के बीच प्रस्तावित मरीन ड्राइव प्रोजेक्ट के लिए भी जमीन अधिग्रहण की जिम्मेदारी दी गयी है. सभी प्रोजेक्टों में भागलपुर जिले की सीमा के अंदर अधिग्रहण करना है, जिससे विभाग का कार्यभार और बढ़ गया है.

समय पर जमीन नहीं मिलने से प्रोजेक्ट पर असर

जब तक अधिग्रहित भूमि उपलब्ध नहीं होती, निर्माण एजेंसियां काम शुरू नहीं कर सकेगी और अगर किसी प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, तो संबंधित जगह पर पहुंचकर अटक सकता है. परिणामस्वरूप, बड़ी परियोजनाओं की लागत बढ़ती है और लंबा इंतजार करना पड़ता है. सबसे अधिक प्रभावित भागलपुर–हंसडीहा फोरलेन रोड परियोजना है, जिसका निर्माण लंबे समय से देरी की भेंट चढ़ा हुआ है और अब तक काम भी शुरू नहीं हो सका है. जमीन अधिग्रहण नहीं होने की वजह आधा दर्जन से अधिक टेंडर को रद्द करना पड़ा है.

गोराडीह में अंतरराज्यीय बस स्टैंड 11 माह पहले की मंजूरी के बाद भी अटका

जिले के गोराडीह में प्रस्तावित अंतरराज्यीय बस पड़ाव का निर्माण सरकारी प्रक्रियाओं की सुस्ती की वजह से आगे नहीं बढ़ सका है. इस प्रोजेक्ट को मुख्यमंत्री की प्रगति यात्रा के दौरान प्राथमिकता सूची में शामिल किया गया था और इसके लिए 15 एकड़ 05 डिसमिल भूमि चिन्हित की गयी है. अनुमानित लागत 14.81 करोड़ रुपये पर प्रशासनिक स्वीकृति भी 11 माह पहले मिल चुकी है. इसके बावजूद निर्माण की दिशा में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाया है. भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी न होने के कारण प्रोजेक्ट अटका हुआ है.

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