bhagalpur news. सब कुछ शरीर के अंदर, बाहर खोजना अज्ञानता

कुप्पा घाट आश्रम में परिनिर्वाण दिवस पर कार्यक्रम.

-महर्षि मेंहीं परमहंस के परिनिर्वाण दिवस पर हुए विविध आयोजन, आश्रम में संतों व सत्संगियों का जुटानसब कुछ शरीर के अंदर से ही प्राप्त हो सकता है. जो बाहर खोजता है, वह अज्ञानता में खोया हुआ रहता है. गुरु की कृपा से जिसने परमात्मा को अपने अंदर पाया, वही जीवात्मा अंदर और बाहर सुखी है. उक्त बातें गुरुसेवी भगीरथदास महाराज ने रविवार को कुप्पाघाट आश्रम में महर्षि मेंहीं परमहंस महाराज के परिनिर्वाण दिवस पर प्रवचन करते हुए कही.परिनिर्वाण दिवस पर विविध आयोजनों में पुष्पांजलि,भंडारा, सत्संग-प्रवचन हुआ. इसे लेकर देशभर के संतों व सत्संगियों का जुटान हुआ.अखिल भारतीय संतमत सत्संग महासभा की ओर से कुप्पाघाट स्थित महर्षि मेंहीं आश्रम में सैकड़ों श्रद्धालुओं के लिए भोजन व ठहरने की व्यवस्था की गयी.

गुरुसेवी भगीरथ बाबा ने बांटे फल, हुआ भंडारा

सुबह में स्तुति विनती और सदग्रंथ पाठ के बाद वर्तमान आचार्यश्री हरिनंदन बाबा के साथ गुरुसेवी स्वामी भगीरथ दास महाराज समेत अन्य संत व सत्संगियों ने महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज को परिनिर्वाण दिवस पर पुष्पांजलि अर्पित की. इसके बाद गुरुसेवी भगीरथ दास महाराज ने सत्संगियों व आमलोगों के बीच केला, आम व खीरा का वितरण किया. इसमें प्रधान सेवक संजय बाबा ने सहयोग किया.सुबह 11 बजे भंडारा का आयोजन किया गया. इसमें हजारों सत्संगियों ने पंक्ति में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया. कार्यक्रम का संचालन अखिल भारतीय संतमत से आये सत्संग महासभा के मंत्री राम कुमार ने किया. अतिथियों का स्वागत व मंच का संचालन स्वामी सत्यप्रकाश बाबा ने किया. गुरुचरणसेवी स्वामी प्रमोद बाबा ने कहा कि सद्गुरु का एक-एक शब्द और वाक्य मानव के लिए प्रेरक है. स्वामी डॉ गुरु प्रसाद बाबा ने कहा कि खासकर सद्गुरु का अंतिम वाक्य भक्तों के लिए लक्ष्मण रेखा का काम करती आ रही है. स्वामी सत्यप्रकाश बाबा ने कहा कि निर्वाण या माेक्ष आवागमन से मुक्ति को कहते हैं. यह मानव जीवन का लक्ष्य भी है. परमाराध्य सद्गुरु ने कठिन साधना कर 1933-34 में आत्मसाक्षात्कार किया.आज के दिन ही 1986 में देह का परित्याग कर परमतत्व परमात्मा में लीन हो गये. स्वामी रवींद्र बाबा, स्वामी संजीवानंद, अनिलानंद बाबा, स्वामी नरेशानंद बाबा, पंकज बाबा आदि संतों ने भी प्रवचन किये. मौके पर व्यवस्थापक अजय जायसवाल, स्वामी पंकज बाबा, रमेश बाबा, कृष्ण बल्लभ बाबा, संजय बाबा, ज्ञानी बाबा, अमित कुमार, अरविंद कुमार, सूरज, बादल आदि उपस्थित थे.

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KALI KINKER MISHRA is a contributor at Prabhat Khabar.

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