सरकार ने सोच समझ कर लिया है पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि का फैसला

Petrol Diesel Price Hike : वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत में तेजी के बाद सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमत में 3-3 रुपए की वृद्धि का फैसला किया है. सरकार के सब्सिडी कम करने से आम आदमी पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा, लेकिन यह निर्णय जरूरी हो गया था.

Petrol Diesel Price Hike : पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच सरकार ने अंतत: देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि का फैसला किया. जिस प्रकार वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ रही थीं, देश में तेल बेचने वाली कंपनियों का घाटा लगातार बढ़ता जा रहा था. इस परिस्थिति में बहुत लंबे समय तक तेल की कीमतों को वैश्विक बाजार के मुकाबले कम कीमत पर बेचना सरकार के लिए संभव नहीं था.

संकट के समय थोड़ा बर्दाश्त करना पड़ता है

पेट्रोल की कीमत बढ़नी ही थी. क्योंकि विश्व भर में जो हालत हैं उसका असर पड़ना तय था. मुझे लगता है कि सरकार ने जो फैसला लिया है वह सोच समझ कर लिया है. पेट्रोल की कीमत में जितना गैप है वो सारा सरकार जनता पर नहीं डालती है. उस गैप को डिस्ट्रिब्यूट करती है. कुछ बोझ जनता पर डालती है, कुछ बोझ अपने सह लेती है, कुछ अप स्ट्रीम कंपनी से लेती हैं, कुछ ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को गैप सहने को कहती है. इसकी वजह है संकट और संकट के समय में सब लोगों को थोड़ा बर्दाश्त करना पड़ता है.

तेल कंपनियों को राहत देने वाला कदम

यहां यह समझने की जरूरत है कि अगर सरकार सिर्फ जनता पर बोझ डालेगी, तो जनता बर्दाश्त नहीं कर पाएगी. सरकार यह नहीं चाहती है कि जनता ज्यादा परेशान हो, लेकिन तेल कंपनियों की हालत ठीक रहे, यह देखना भी सरकार का दायित्व है. तेल कंपनियों की सरकार इसलिए फिक्र करती है क्योंकि वे देश को एनर्जी सुरक्षा प्रदान करते हैं. सरकार सबका सोचती है और उसके बाद निर्णय किया जाता है. यह कोई इकोनॉमिक डिसीजन नहीं होता है, सरकार गंभीर चिंतन के बाद सबके बारे में सोचकर फैसला करती है. यही वजह है कि सरकार ने क़ीमत कम बढ़ाया है.

संकट बरकरार रहा तो दाम और बढ़ेंगे

गौर करने वाली बात यह है कि अगर वेस्ट एशिया का संकट ऐसा ही रहा और क्रूड का दाम बढ़ता ही रहा तो सरकार को कीमत और बढ़ाना पड़ सकता है. जहां तक इंपैक्ट की बात है तो सरकार के इस कदम से निश्चित तौर पर थोड़ी महंगाई बढ़ सकती है. कंज्यूमर को अधिक दाम देना पड़ सकता है, लेकिन हमें यह भी देखना है की अभी ऑयल कंपनियां आईसीयू में है. उनको जिंदा रखने के लिए सरकार ने थोड़ा सपोर्ट दिया है. लेकिन आगे होर्मुज संकट खत्म नहीं हुआ तो पेट्रो पदार्थ की क़ीमत और भी बढ़ सकती है.

(लेखक पूर्व पेट्रोलियम सचिव हैं)

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आरएस पांडेय is a contributor at Prabhat Khabar.

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