– अखलाश व सही नियत से की गयी कुर्बानी अल्लाह को पसंद- गले मिल कर मुस्लिम भाई एक-दूसरे को बकरीद की मुबारकवाद दी
हजरत इब्राहिम अलैह सलाम की सुन्नत ईद-उल-अजहा (बकरीद) गुरुवार को मनायी. मौके पर अकीदतमंदों ने मुल्क में अमन, शांति व भाईचारा की दुआ मांगी. सारे गिले- शिकवा भुला लोगों ने एक-दूसरे को बकरीद की मुबारकवाद दी. बकरीद को लेकर मुस्लिम इलाका गुलजार रहा. बकरीद की नमाज शाहजंगी ईदगाह, बरहपुरा ईदगाह, फतेहपुर ईदगाह, शाहजहानी मस्जिद मौलानाचक, शाही मस्जिद शाहमार्केट, जामा मस्जिद तातारपुर, शाही मस्जिद लाल कोठी जब्बारचक, जामा मस्जिद भीखनपुर, जामा मस्जिद बरारी, जामा मस्जिद चंपानगर, जामा मस्जिद हुसैनाबाद, जामा मस्जिद मोजािहदपुर, गौसिया मस्जिद हुसैनपुर, जामा मस्जिद हबीबपुर, जामा मस्जिद चमेलीचक सहित तीन सौ से अधिक मस्जिदों में अदा की गयी. ईदगाहों व मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए सुबह से ही अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ने लगी थी. नामाजियों की ज्यादा भीड़ होने से मस्जिदों में जगह नहीं मिलने पर लोगों को सड़क पर भी नमाज अदा करनी पड़ी. बरहपुरा ईदगाह में जामा मस्जिद के इमाम मौलाना कुदरतउल्लाह ने नमाज पढ़ायी. मौके पर उन्होंने कहा कि बकरीद त्योहार तकवा व परहेजगारी का पैगाम देता है. सच्ची नियत व अखलास से की गयी कुर्बानी अल्लाह को बहुत पसंद है. हजरत इब्राहिम अलैह सलाम ने अल्लाह के हुक्म को मानते हुए अपने बेटे की कुर्बानी देने के लिए राजी हो गये. हजरत इब्राहिम अलैह सलाम की सुन्नत को बकरीद के रूप में मनाया जाता है. बकरीद के मौके पर संकल्प लें कि अल्लाह ने जिस काम करने का हुक्म दिया है. जिस काम में अल्लाह की रजामंदी है. ऐसे कामों को अल्लाह के लिए करें. गलत कामों व बुराई से खुद बचे व दूसरों को भी बचाये. उन्होंने कहा कि बकरीद आपसी भाईचारा व शांति का भी पैगाम देता है. इसी जज्बे के साथ लोगों को चाहिए की दूसरों के लिए काम आयें. स्वार्थ व दिखावा की भावना से काम नहीं करें. बल्कि अल्लाह की रजामंदी के लिए करें. तभी बकरीद त्योहार मनाने का असल मकसद होगा.साफ-सफाई रखने के लिए कहा गया
ईदगाह व मस्जिदों से इमाम ने कुर्बानी को लेकर लोगों को साफ-सफाई रखने की भी विशेष रूप से अपील की गयी. उन्होंने कहा कि कुर्बानी के बाद जानवरों की अवशेष को यहां-वहां नहीं फेकें. बल्कि जमीन के अंदर गाड़ दें. ताकि समाज के किसी लोगों को परेशानी नहीं हो.
बच्चों ने की मौज -मस्ती
ईदगाहों व मस्जिदों के बाहर मेला जैसा माहौल था. छोटे व बड़े झूले पर बैठ कर बच्चों ने मौज मस्ती की. गोलगप्पे भी खूब खाये. बिना समय गंवाये बच्चों ने जमकर मौज-मस्ती की. बच्चे खासे उत्साहित थे. बकरीद की नमाज अदा करने के लिए बच्चे व बड़े सुबह से ही तैयारी में जुटे थे.
गले मिलने का चलता रहा दौर
नमाज अदा करने के बाद देर शाम तक गले मिलने का दौर चलता रहा. एक-दूसरे को मुबारकवाद देने के लिए झुंड में लोग रिश्तेदारों व दोस्तों के घर पहुंच रहे थे. गले मिल कर मुबारकवाद दे रहे थे. पूरा माहौल खुशनुमा बना था. महिलाएं भी अपने झुंड में रिश्तेदारों के घर पहुंच रहीं थीं.सुरक्षा का पुख्ता व्यवस्था
बकरीद की नमाज को लेकर जिले भर के ईदगाहों व मस्जिदों के बाहर सुरक्षा के लिए पुलिस पदाधिकारी दल-बल के साथ तैनात थे. जिले के आला अधिकारी सुरक्षा को लेकर मॉनिटरिंग कर रहे थे. जिले के वरीय पुलिस अधीक्षक अपने अधिकारियों से लगातार सुरक्षा व लोकेशन की जानकारी लेते रहे. शहर के सभी चौक-चौराहों पर भी पुलिस पदाधिकारी, दंडाधिकारी व पुलिस जवानों की तैनाती की गयी थी.
