Bhagalpur News. अवकाश मामले में गैर मुस्लिम शब्द के प्रयोग पर भड़के सिंडिकेट सदस्य

टीएमबीयू में अवकाश पत्र को लेकर विवाद.

टीएमबीयू प्रशासन अंतिम जुमा पर मुस्लिम कर्मियों की छुट्टी का पत्र जारी कर फंसाटीएमबीयू से गुरुवार को जारी पत्र में अंतिम जुमा पर केवल मुस्लिम कर्मियों की छुट्टी की घोषणा की गयी थी. साथ ही गैर मुस्लिमों की छुट्टी रद्द करते हुए शुक्रवार को विवि, पीजी विभागों, संबंधित इकाई व कॉलेजों के कार्यालय में कार्य करने का अधिसूचना जारी की गयी थी. पत्र जारी होने के बाद विवि प्रशासन फंस गया है. चारों तरफ से कड़ी आपत्ति जतायी जा रही है.इसे लेकर विवि के सिंडिकेट सदस्य सह एमएलसी डॉ संजीव कुमार सिंह भड़के हुए हैं. उन्होंने कहा कि विवि प्रशासन ने किस नियम से पूर्व घोषित अवकाश काे रद्द किया. किस नियम से गैर मुस्लिम शब्द का प्रयोग किया गया. उन्होंने कहा कि विवि प्रशासन पहले अंतिम जुमा को लेकर पत्र जारी कर पूरी तरह अवकाश घोषित किया था. दो दिन बाद उस निर्णय को पलटते हुए केवल मुस्लिम कर्मचारियों को छुट्टी देने का पत्र जारी किया है. जबकि ईद व रामनवमी दोनों पर्व साथ-साथ है. फिर छुट्टी केवल एक समुदाय के कर्मचारियों को क्यों? ऐसे में विवि प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगा है. उन्होंने विवि प्रशासन पर सवाल उठाया की रामनवमी के अवकाश में क्या विवि से गैर मुस्लिमों की छुट्टी रद्द करने का पत्र जारी किया जायेगा. उन्होंने विवि प्रशासन से मांग की है कि विवि ऐसे पत्र को अविलंब वापस ले. सभी कर्मियों के लिए समान रूप से अवकाश घोषित करें. साथ ही कहा कि मामले का विरोध कर रहे छात्र संगठनों का समर्थन किया जाएगा.

उधर, मामले में सिंडिकेट, सीनेट सदस्य व शिक्षकों ने दबी जुबान से विवि प्रशासन के रवैये पर कड़ी आपत्ति जतायी है. बता दें कि मामले में दो दिन पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश सह मंत्री कुणाल पांडे ने बयान जारी कर टीएमबीयू के प्रभारी कुलपति पर सीधा सवाल उठाते हुए विश्वविद्यालय द्वारा जारी कार्यालय आदेश जिसमें केवल मुस्लिम कर्मचारियों को माहे रमजान के आखिरी जुमा पर क्षतिपूर्ति अवकाश दिये जाने पर विरोध किया था. आरोप लगाया था कि प्रभारी कुलपति के निर्देश पर जारी यह आदेश पूरी तरह भेदभावपूर्ण है. इसमें ईद-उल-फितर के अवसर पर केवल एक विशेष समुदाय के कर्मियों को अवकाश दिया गया है. जबकि अन्य कर्मियों के लिए कार्यालय खुला रखने का निर्णय लिया गया है. यह कदम समानता और निष्पक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ है. विवि पिछले तीन अलग-अलग पत्र में लिया यू-र्टन लिया है. सबसे पहले विवि से पत्र जारी कर सभी कॉलेजों को अपने-अपने स्तर से इंटर्नशिप कराने के लिए कहा था. एक सप्ताह बाद विवि के प्रभारी कुलपति के निर्देश पर इंटर्नशिप को बंद करा दिया. विवि से 28 फरवरी को अधिसूचना जारी कर पीजी अंगिका विभाग का नये हेड डॉ शोभा कुमारी को बनाया था. इससे विवाद शुरू होने लगा, तो 20 दिन बाद टीएमबीयू प्रशासन ने उस अधिसूचना रद्द करते हुए नया हेड डॉ गौतम कुमार यादव को बनाया. प्रभारी कुलपति के आदेश पर रजिस्ट्रार ने अधिसूचना जारी की है. मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि विवि ने तीसरी बार कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश का पत्र रद्द करते हुए केवल मुस्लिम कर्मचारी को माहे रमजान के अंतिम जुमा पर अवकाश दिये जाने का पत्र जारी किया.

इंटर्नशिप मामले की भी संजीव सिंह ने की आलोचना

विवि के सिंडिकेट सदस्य डॉ संजीव कुमार सिंह इंटर्नशिप मामले में भी विवि प्रशासन आड़े हाथों लिया है. उन्होंने कहा कि विवि प्रशासन इंटर्नशिप मामले में भी छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है. इसे बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. उन्होंने कहा सरकार के स्तर पर विवि में पांच संस्थान है. इसमें बायोटेक, पीजी बायोटेक्नोलॉजी, टीशू लैब, एग्रोसेंटर, रीजनल स्टडी सेंटर में भी छात्र-छात्राओं को इंटर्नशिप नि:शुल्क कराया जा सकता है. इसके अलावा बीएयू व इंजीनियरिंग कॉलेज में भी इंटर्नशिप करा सकते हैं. लेकिन किसी बाहरी एजेंसी से इंटर्नशिप कराने के नाम पर प्रत्येक छात्रों से रकम वसूला जायेगा. उन्होंने कहा कि सूबे के अन्य विवि से जानकारी मिल रही कि एक-एक कॉलेज से इंटर्नशिप के नाम पर विद्यार्थियों से लाखों रुपये वसूला जायेगा. सिंडिकेट सदस्य ने कहा कि विवि प्रशासन सरकार संस्थानों में विद्यार्थियों का इंटर्नशिप कराएं. कुछ लोग इंटर्नशिप के नाम पर पैसों का बंदरबाट करना चाहते हैं. ऐसा होने नहीं दिया जायेगा.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By KALI KINKER MISHRA

KALI KINKER MISHRA is a contributor at Prabhat Khabar.

Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >