गोपालपुर / भागलपुर. गंगा के भीषण कटाव का सामना कर रहे राघोपुर में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के दोबारा पहुंचने को लेकर प्रशासनिक तैयारियों के बीच प्रभावित परिवारों की समस्याएं अब भी बनी हुई हैं. मुख्यमंत्री ने इससे पहले 5 सितंबर को काजीकोरैया-राघोपुर तटबंध का निरीक्षण कर कटावरोधी कार्यों की जानकारी ली थी और बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए थे.
इस बीच राघोपुर में गंगा की धारा और कटाव का दबाव प्रभावित इलाकों के लिए चुनौती बना हुआ है. रिपोर्टों के अनुसार, कटाव के कारण 200 से अधिक परिवार विस्थापित हुए हैं.
तटबंध ने झेला गंगा की तेज धारा का दबाव
राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध पर इस साल गंगा की तेज धारा का दबाव लगातार बना रहा. जुलाई के अंतिम सप्ताह से शुरू हुआ कटाव अगस्त में और गंभीर हुआ. 26 जुलाई की रात करीब 150 मीटर तटबंध का हिस्सा गंगा में समा गया था. इसके बाद भी अलग-अलग स्थानों पर कटाव की स्थिति सामने आती रही.
सितंबर की शुरुआत में भी गंगा की मुख्य धारा के तटबंध की ओर बढ़ने से दबाव बढ़ने की रिपोर्ट सामने आयी थी. जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने भी बदलते प्रवाह और तेज धारा के कारण चुनौती बने रहने की बात कही थी.
कटाव थमा तो भी विस्थापन का संकट कायम
कटावरोधी कार्य और लगातार निगरानी से कई स्थानों पर स्थिति नियंत्रित करने की कोशिश की गयी, लेकिन प्रभावित परिवारों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं. कटाव में घर, खेत और संपत्ति गंवाने वाले कई परिवारों के सामने सुरक्षित ठिकाने और पुनर्वास की चिंता बनी हुई है.
तटबंध और सड़क किनारे अस्थायी रूप से रह रहे परिवारों के लिए पानी कम होना भी तत्काल समाधान नहीं है. उनके सामने घर लौटने, आवागमन और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं.
पशुपालकों के सामने चारे का संकट
बाढ़ और कटाव से प्रभावित पशुपालकों के लिए मवेशियों के चारे की व्यवस्था भी बड़ी चुनौती है. खेतों में पानी रहने के कारण हरा चारा उपलब्ध नहीं है. वहीं लगातार सूखा चारा खरीदना हर परिवार के लिए आसान नहीं है.
ऊंचे स्थानों या सड़क किनारे शरण लिये पशुपालकों के सामने मवेशियों के लिए चारा, पानी और सुरक्षित जगह की व्यवस्था की समस्या बनी हुई है. ग्रामीणों का कहना है कि राहत सामग्री और भोजन के साथ पशुओं के लिए नियमित चारे की व्यवस्था भी जरूरी है.
अब पुनर्वास और स्थायी सुरक्षा की मांग
राघोपुर के प्रभावित परिवारों की मांग अब केवल तत्काल कटावरोधी कार्य तक सीमित नहीं है. ग्रामीण स्थायी तटबंध सुरक्षा के साथ कटाव प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, बेहतर आवागमन, राहत सामग्री और पशुचारे की व्यवस्था की मांग कर रहे हैं.
5 सितंबर के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री की ओर से गंगा की गाद हटाने और तटबंधों की मरम्मत जैसे उपायों की बात सामने आयी थी. बाद में राघोपुर-काजीकोरैया मार्जिनल बांध पर दबाव कम करने के लिए गाद हटाने की पहल की खबर भी सामने आयी.
दूसरे दौरे में लोगों की नजर राहत और पुनर्वास पर
मुख्यमंत्री के दोबारा राघोपुर पहुंचने के बीच स्थानीय लोगों की नजर अब कटाव से हुए नुकसान और प्रभावित परिवारों की समस्याओं पर है. उनके लिए सवाल सिर्फ गंगा का जलस्तर घटने तक सीमित नहीं है.
कटाव में उजड़े परिवारों को सुरक्षित ठिकाना कब मिलेगा, पशुपालकों के लिए चारे की व्यवस्था कैसे होगी और तटबंध को भविष्य के कटाव से सुरक्षित रखने के लिए क्या स्थायी उपाय होंगे—इन मुद्दों पर स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है.
