कुलपति के आश्वासन के बाद पांच दिनों से जारी अनशन टूटा, छात्रों की बिगड़ी तबीयत

- टीएमबीयू के डीएसडब्ल्यू व बीएन काॅलेज के प्राचार्य ने जूस पिलाकर छात्राें का आंदोलन कराया खत्म

टीएमबीयू के कुलपति प्राे जवाहर लाल के आश्वासन के बाद शुक्रवार को पीजी हिंदी विभाग के छात्राें ने पांच दिन से जारी अनशन समाप्त कर दिया. डीएसडब्ल्यू प्राे बिजेंद्र कुमार व बीएन काॅलेज के प्राचार्य अशाेक कुमार ठाकुर ने जूस पिलाकर छात्राें का अनशन खत्म कराया. वहीं बीमार छात्राओं के इलाज के लिए धरना स्थल पर डॉक्टर को बुलाकर जांच करायी गयी. बीमार छात्र-छात्राओं को वाहन पर बिठाकर अपने घर व हॉस्टल तक पहुंचाया गया. अनशन में शामिल कुछ छात्राओं की हालत काफी बिगड़ गयी थी. कुछ छात्रों को चक्कर आ रहा था, तो कोई बार-बार बेहोश हो रहा था. पांच दिन से भूखे-प्यासे छात्रों ने बताया कि शिक्षक दिव्यानंद देव के हिंदी विभाग में वापसी नहीं होने पर आगे की रणनीति बनायी जायेगी.

कुलपति आवास पर छात्रों की हुई मीटिंग

टीएमबीयू के पदाधिकारियों के पहुंचने के बाद दोपहर 12:30 बजे अनशन टूटा. इससे पहले कुलपति के आवासीय कार्यालय जाकर पीजी छात्रा वर्षा, प्रिया, हैप्पी आनंद भारद्वाज, रूपेश और कुंदन ने वार्ता की. वार्ता के बाद छात्रों ने बताया कि कुलपति के किडनी में परेशानी थी. वह बेड पर लेटे हुए थे. कहा कि शिक्षक को वापस विभाग में लाने के लिए विचार किया जायेगा. इसलिए आपलोग अनशन वापस लीजिये. बता दें कि मामले को शांत करने के लिए राजभवन व प्रशासनिक स्तर से भी कुलपति को लगातार फोन आ रहा है. कुलपति के आग्रह के बाद 31 जनवरी से शुरू हुए विवाद पर फिलहाल विराम लग गया है. पीजी हिंदी विभाग के छात्र व एबीवीपी के राज्य विवि कार्य प्रमुख हैप्पी आनंद ने बताया कि कुलपति ने वार्ता के दौरान कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है. उन्हें पटना जाना है. प्रदर्शन के कारण वह नहीं जा सके हैं.

शिक्षक केके मंडल का मामला हो रहा गर्म

पीजी हिंदी विभाग से नारायणपुर स्थित जेपी कॉलेज में ट्रांसफर किये गये डॉ दिव्यानंद के बाद इतिहास विभाग के शिक्षक डॉ केके मंडल का मुद्दा भी गरमा रहा है. इतिहास विभाग के पूर्ववर्ती छात्र व विवि छात्र संघ के पूर्व संकाय प्रतिनिधि कृष्ण बिहारी गर्ग ने कुलपति से पूछा है कि केके मंडल के मामले में बनी कमेटी के निर्णय को लागू करने में इतना विलंब क्यों हाे रहा है. फरवरी 2023 में केके मंडल पर एक महिला शिक्षक से दुर्व्यवहार के बाद जांच में आरोप गलत पाये गये. बावजूद उन्हें नारायणपुर से वापस नहीं लाया जा रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

संबंधित खबरें >

bhagalpur news. भागलपुर में विकसित होंगी राष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं, धोनी और ईशान किशन की राह पर निकलेंगे नये सितारे

bhagalpur news. पुलिया हटाने के विरोध मामले में जांच करने पहुंचे एसडीएम व नाथनगर विधायक

bhagalpur news. समय पर पूरा करें प्रखंड में संचालित योजनाएं

bhagalpur news. प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे व साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो - लोकभवन ने विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने दिया निर्देश- लोकभवन ने पत्र में कहा, निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायेवरीय संवाददाता, भागलपुरपीजी व कॉलेज में प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो. इसे लेकर लोकभवन के विशेष कार्य अधिकारी न्यायिक कल्पना श्रीवास्तव ने टीएमबीयू सहित सूबे के अन्य विश्वविद्यालयों में पत्र भेजा है. पत्र में विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है. विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार को लेकर सचिवालय ने विवि प्रशासन को सख्त रुख अपनाने के लिए कहा है. शिक्षकों के कार्यभार को लेकर जारी निर्देश में स्पष्ट कहा कि निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायी जाये.लोकभवन से जारी पत्र में कहा कि पूर्णकालिक कार्यरत सभी शिक्षकों को सेमेस्टर के दौरान प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनका साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो.शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह लागू रहेगापत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि न्यूनतम कार्यभार एक शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह यानी 180 कार्य दिवसों तक लागू रहेगा. साप्ताहिक 40 घंटे के कार्यभार को छह कार्य दिवसों में समान रूप से विभाजित करने का निर्देश दिया है. कहा कि यूजीसी के प्रावधानों में भी कार्यभार से संबंधित इसी तरह के मानदंड निर्धारित हैं. जिन्हें कानूनी मान्यता प्राप्त है. उनका पालन अनिवार्य है. उन मानकों को सख्ती से लागू कर बेहतर शैक्षणिक परिणाम सुनिश्चित करें.लोकभवन को मिली शिक्षकों के गायब रहने की शिकायतलोकभवन को शिक्षकों के गायब रहने की शिकायत मिल रही है. अंदरखाने की मानें, तो कुछ छात्र संगठन व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कॉलेज व पीजी विभागों में निर्धारित समय से पहले ही गायब रहने की शिकायत लोकभवन से की है. इसे लेकर कुलाधिपति सख्त होते दिख रहे है. ऐसे में कॉलेजों व पीजी विभाग का औचक निरीक्षण भी किया जा सकता है.ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी की नहीं होती है क्लासकॉलेज में ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी विषय की क्लास नहीं होती है. एक दिन पहले छात्र राजद के कार्यकर्ताओं ने एक कॉलेज के प्राचार्य से वार्ता के दौरान कहा था कि एमजेसी (ऑनर्स) विषय की क्लास होती है, लेकिन एमआइसी (सब्सिडियरी) विषय की क्लास नहीं होती है. छात्र संगठन का आरोप था कि एईसी, वीएसी व एसीसी की भी क्लास भी नहीं होती है.लोकभवन के निर्देश का हो रहा पालन - शिक्षक संगठनशिक्षक संगठन भुस्टा के महासचिव प्रो जगधर मंडल ले कहा कि लोकभवन के निर्देश का पालन हो रहा है. यूजीसी के नियमानुसार कॉलेज व पीजी विभागों में पांच घंटे तक शिक्षकों रहते हैं. सारा कार्य करते हैं. यह कोई नई बात नहीं है. शिक्षक लोकभवन के साथ है.

यह भी पढ़ें >