सुलतानगंज. गंगा दशहरा ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी रविवार को मनाया जायेगा. गंगा दशहरा पर बिजू आम, बताशा मां गंगा को चढ़ा लोग मनोवांछित फल की प्राप्ति करते हैं. आज ही के दिन गंगा पृथ्वी पर आयी थी. इस दिन गंगा में स्नान करने से 10 तरह के पाप का नाश होता है. पंडित संजीव झा ने बताया कि मनुष्यों के उपार्जित करोड़ों जन्मों के पाप गंगा के वायु स्पर्श मात्र से नष्ट हो जाते हैं. स्पर्श व दर्शन की अपेक्षा गंगा में मौसल स्नान करने से 10 गुना पुण्य होता है. मौसल स्नान, गंगा को प्रणाम कर बिना हाथ पैर हिलाये शांत भाव से स्नान को कहते हैं. पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान की महत्ता अत्यधिक है.
अजगैवीनगरी में उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़
गंगा दशहरा पर अजगैवीनगरी में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी. पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा तट पर स्नान के लिए दूर-दूर से श्रद्धालुओं का पहुंचना शनिवार देर शाम से शुरू हो गया है. गंगा तट पर स्नान पूजन को लेकर श्रद्धालुओं की काफी भीड़ की संभावना है. मुंडन सहित अन्य शुभ कार्य संपन्न किये जायेंगे. सैकड़ों भक्त गंगा जल लेकर बाबाधाम प्रस्थान करते हैं. गंगा दशहरा को लेकर बाजार में विशेष चहल-पहल रहेगी. गंगा घाट पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहेगा. पंडा समाज की ओर से ध्वजागली में मां गंगा की प्रतिमा बैठायी जा रही है. मौके पर कुंवारी कन्याओं को भोजन कराया जाता है.108 नये लोगों को आध्यात्मिक दीक्षा आगमानंद महाराज ने दी
नवगछिया सुकटिया तिरासी भगवती मंदिर के सामने रूद्र चंडी महायज्ञ के सातवें दिन परमहंस स्वामी आगमानंद महाराज ने शनिवार को 108 नये लोगों को आध्यात्मिक दीक्षा दी. सभी ने अपने गुरुदेव की पूजा की. यहां पहले से दीक्षित सैकड़ों शिष्यों ने उनकी पूजा अर्चना की. स्वामी आगमानंद महाराज के सानिध्य में काशी से यहां पहुंचीं मानस कोकिला हीरामणि, श्रवण शास्त्री, भजन सम्राट डाॅ हिमांशु मोहन मिश्र दीपक,पंडित प्रेम शंकर भारती बारी-बारी से कथा मंच पर प्रवचन कर रहे हैं. कुंदन बाबा लगातार यज्ञ संचालन कर रहे हैं. काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा कर वहां स्थापित देवी-देवताओं की पूजा की. स्वामी आगमानंद ने रामकथा सुनाते हुए कहा कि भगवान का जन्म लोगों कल्याण के लिए होता है. उन्होंने लोगों को जीवन जीने की सीख दी. गीतकार राजकुमार के दीप गान से समारोह का शुभारंभ हुआ. डॉ मृत्युंजय सिंह गंगा ने अतिथियों व आयोजक यज्ञ समिति के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की. स्वामी जी ने कहा कि अपना यह प्यारा भारतवर्ष, अवतारों, ऋषि-मुनियों, संत-महात्माओं व सिद्धों की धरती रही है और आगे भी रहेगी. हमें अपनी विरासत को आत्मसात कर आगे बढ़ते रहना चाहिए, ताकि हमारा सद्सं स्कार और गुरुजनों के प्रति समर्पण की भावना सदैव सुरक्षित व संरक्षित रहे. मंच संचालन श्याम ने किया.
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