bhagalpur news. प्रदेश के विश्वविद्यालयों में सती बिहुला व विषहरी लोकगाथा पर शोध कराने की होगी व्यवस्था

प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में साहित्य विषय के तहत सती बिहुला व विषहरी लोकगाथा पर शोध कराने की व्यवस्था को लेकर प्रयास करेंगे, तभी हम अपनी विरासत से जुड़ पायेंगे.

प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में साहित्य विषय के तहत सती बिहुला व विषहरी लोकगाथा पर शोध कराने की व्यवस्था को लेकर प्रयास करेंगे, तभी हम अपनी विरासत से जुड़ पायेंगे. बहुत कुछ बिखरा है, इसे सहेजने की जरूरत है. पुरातत्व विभाग भी इन चीजों को आगे बढ़ा सकेंगे. जनमानस में सती बिहुला-विषहरी लोकगाथा की अमिट छाप है. उक्त बातें प्रदेश के कला-संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री मोतीलाल प्रसाद ने बुधवार को कही. मौका था भागलपुर संग्रहालय की ओर से आधुनिक प्रेक्षागृह में सात दिवसीय मंजूषा लोक कला कार्यशाला के शुभारंभ का. इसमें 31 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. इसी क्रम में मंजूषा कला की प्रदर्शनी भी लगायी गयी. अतिथियों ने कला देखकर सराहना की. मिथिला कला से मंजूषा कला कमतर नहीं मंत्री मोतीलाल प्रसाद कहा कि मिथिला कला अर्थात मधुबनी पेंटिंग से मंजूषा कला कमतर नहीं है. इसका सांस्कृतिक इतिहास समृद्ध है. इसे संग्रहित कमरने की जरूरत है. आने वाले दिनों में यह ऊंचाई को छुयेगा. इसका संघर्ष भी लंबा रहा है. इसी क्रम में उन्होंने मेयर डॉ बसुंधरा लाल की अटल कला भवन के लिए जमीन उपलब्ध कराने की मांग को लेकर कहा कि जिलाधिकारी को जमीन उपलब्ध करायें, शीघ्र इस कला भवन का निर्माण होगा. जमीन अभी उपलब्ध हो जाये, तो विधानसभा चुनाव के आचार संहिता में नहीं फंसेगा. इससे पहले कार्यशाला का उद्घाटन मंत्री मोतीलाल प्रसाद, बिहार संग्रहालय के अध्यक्ष अशोक सिन्हा, मेयर डॉ बसुंधरालाल, भाजपा जिलाध्यक्ष, कला संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन व संग्रहालय अध्यक्ष डॉ सुधीर यादव ने संयुक्त रूप से किया. विशिष्ट अतिथि के रूप में जिलाधिकारी डॉ नवलकिशोर चौधरी शामिल हुए. अतिथियों का स्वागत किलकारी के कलाकारों ने भरतनाट्यम नृत्य के माध्यम से गणेश वंदना व स्वागत गान प्रस्तुत किया. डॉ सुधीर यादव ने स्वागत संबोधन दिया, तो मंच का संचालन आकाशवाणी के वरीय उद्घोषक रहे डॉ विजय कुमार मिश्र ने किया. अशोक सिन्हा ने कहा कि संग्रहालय में रखी गयी कृति व ऐतिहासिक मूर्ति कई पीढ़िया देखेंगी. इस कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागी द्वारा तैयार उत्कृष्ट मंजूषा कला को भी संग्रहालय में जगह मिलेगी. पिछले 10 साल में आठ स्टेट अवार्ड मंजूषा कलाकार पा चुके हैं, जो बड़ी उपलब्धि है. पहले 60 साल बाद कलाकारों को पेंशन मिलता था, अब 50 साल में कलाकार को 3000 रुपये प्रतिमाह मिलेगा. मंजूषा कलाकाराें ने उठायी मांग, मंत्री ने दिया आश्वासन भाजपा जिलाध्यक्ष संतोष कुमार ने मूर्तिकला के माध्यम से सती बिहुला गाथा को प्रदर्शित करने की मांग उठायी. मंजूषा कलाकारों ने अलग-अलग मांग उठायी. राज्य पुरस्कार प्राप्त मंजूषा गुरु मनोज पंडित ने गुणवत्ता युक्त पेंटिंग को संग्रहालय में जगह देने मामले पर खुशी जतायी. कहा कि मनसा पूजा के पहले दिन इस कार्यक्रम शुरू होना भी शुभ है. राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त कलाकार डॉ उलूपी झा ने कहा कि कॉमन फेसलिटी सेंटर खुलने वाला था, लेकिन नहीं खुला. मिथिला की तरह मंजूषा कला सेंटर खुले. अनुकृति झा, पवन सागर ने मंजूषा हाट खोलने की मांग की, तो लिट्टी-चोखा की तरह झाल-मुढ़ी की ब्रांडिंग करने की मांग की. अंजना, हीना ने मंजूषा कला को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग की. मंत्री मोतीलाल प्रसाद ने आश्वासन दिया कि इन मांगों पर गंभीरता से ध्यान देंगे. मौके पर गांधीवादी कार्यकर्ता मनोज मीता, श्रीकृष्णा कलायन कला केंद्र की निदेशक श्वेता सुमन, संग्रहालय के प्रधान लिपिक अमिताभ मिश्रा, किलकारी के पदाधिकारी साहिल राज आदि उपस्थित थे.

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Author: ATUL KUMAR

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