पुलिस का एफआइआर सच या हवलदार देवेंद्र का कथन

भागलपुर: मुठभेड़ में शहीद हुए शाहकुंड थाना के दारोगा अविनाश कुमार मामले में दर्ज प्राथमिकी और घटना के चश्मदीद बीएमपी के हवलदार देवेंद्र सिंह के बयान में विरोधाभास पैदा हो गया है. एफआइआर दर्ज होने से पहले हवलदार का कथन कुछ और था, जबकि एफआइआर में सब कुछ बदल गया है. हवलदार के बयान पर […]

भागलपुर: मुठभेड़ में शहीद हुए शाहकुंड थाना के दारोगा अविनाश कुमार मामले में दर्ज प्राथमिकी और घटना के चश्मदीद बीएमपी के हवलदार देवेंद्र सिंह के बयान में विरोधाभास पैदा हो गया है.

एफआइआर दर्ज होने से पहले हवलदार का कथन कुछ और था, जबकि एफआइआर में सब कुछ बदल गया है. हवलदार के बयान पर ही पुलिस ने बुधवार को प्राथमिकी दर्ज की है. एफआइआर में कहा गया है कि मुठभेड़ से पहले ही एक अपराधी तारिणी मंडल को गिरफ्तार कर लिया था. जबकि हवलदार ने पहले कहा था कि मुठभेड़ के बाद एक अपराधी को मौके पर से गिरफ्तार किया गया था, जो रमणी बहियार के ताड़ पेड़ के पास था. हवलदार व उसके साथ अन्य जवानों ने बताया था कि अपराधियों को भनक न लगे, इसके लिए हमलोगों ने टॉर्च नहीं जलाया. लेकिन एफआइआर में टॉर्च जलाने की बात कही गयी है. घेराबंदी के बाद दारोगा ने अपराधियों को दो-दो बार सरेंडर करने को कहा.

लेकिन अपराधियों ने जाति सूचक शब्द का प्रयोग किया और पुलिस पर फायरिंग की. इसपर दारोगा ने भी अपने सर्विस पिस्टल से एक फायर किया.इंसास से चली चार गोली का खोखा कहां गया : प्राथमिकी में कहा गया है कि बीएमपी हवलदार देवेंद्र ने अपने सर्विस इंसास से चार गोली चलायी. पर मौका-ए-वारदात से इंसास का एक खोखा मिला है, बाकी खोखा कहां गया, इस पर रहस्य बना हुआ है. अगर इंसास से चार गोली चली है तो उसका खोखा कहां गया. इस पर जवानों का कहना है कि मुठभेड़ के बाद बारिश होने लगी थी. इस कारण खोखा बहियार में मिट्टी में दब गया होगा. अगर ऐसा है तो फिर सुबह में मौके पर से एक खोखा कैसे मिल गया.

हवलदार देवेंद्र ने क्या कहा था

– पचरुखी बाजार से खुलनी गांव पहुंचे. वहां मूंजत गांव जाने वाले रास्ते में जीप को खड़ा कर दिया और अपराधियों का इंतजार करने लगे.

– सारे अपराधी मूंजत गांव ही जाने वाले थे. इसी बीच दारोगा अविनाश धीरे-धीरे अपराधियों के आने की दिशा में पैदल बढ़ने लगे.

– हमलोगों को निर्देश दिया गया कि टॉर्च और जीप की हेड लाइट बंद कर दें, ताकि अपराधियों को भनक न लग सके.

– दारोगा जैसे ही आगे बढ़े सामने से एक अपराधी को उन्होंने पकड़ लिया. इसी बीच दूसरे अपराधी ने गोली चला दी.

– गोली चलने की आवाज सुन कर हमलोग दौड़े. अंधेरे में पहले तो गोली चलाने में हिचके. क्योंकि दारोगा आगे थे.

– लेकिन कुछ दूर जाने के बाद दारोगा जख्मी हालत में गिर पड़े थे. दो जवानों ने उन्हें उठाया और हवलदार देवेंद्र ने अपराधियों पर फायरिंग की.

– तीन अपराधी भाग निकले, लेकिन एक अपराधी तारिणी मंडल पकड़ा गया.

एफआइआर में क्या कहा गया

– मुठभेड़ से पहले ही एक अपराधी तारिणी मंडल पकड़ा गया और तीन अपराधी भाग निकले.

– पीछा करने पर तीनों अपराधियों ने पोजीशन ले लिया और पुलिस पर फायरिंग की.

– दारोगा अविनाश ने बीएमपी जवानों को पोजीशन लेने का निर्देश दिया.

– ऊंची आवाज में दारोगा ने तीनों अपराधी से सरेंडर करने को कहा.

– इस पर अपराधियों ने दारोगा को जाति सूचक शब्द से संबोधित किया और भाग जाने को कहा.

– नहीं भागने पर अपराधियों ने दारोगा को मार डालने की भी धमकी दी.

– इसके बाद अपराधियों ने फायर कर दिया, जिसमें हमलोग बाल-बाल बच गये.

– पुन: दारोगा ने अपराधियों को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया. लेकिन जबाव के बदले अपराधियों ने गोली चला दी.

– इस पर दारोगा ने अपने सर्विस पिस्टल से एक फायर किया. जबाव में अपराधियों ने भी फायरिंग कर दिया, जिसमें वे जख्मी हो गये.

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