जानें, बिहार में कैसे एक बिजली बिल ने किया मौत के फरमान पर हस्ताक्षर, और चली गयी...

भागलपुर : बिहार के विभिन्न जिलों में बिजली विभाग के कारनामे से सबलोग वाकिफ हैं. कभी पोल से सटकर किसी की जान चली जाती है, तो कभी ओवर हेड वायर गिरने से किसी की मौत हो जाती है. अब एक नया मामला सामने आया है. जिसमें एक व्यक्ति की बिजली बिल देखते ही हार्ट अटैक […]

भागलपुर : बिहार के विभिन्न जिलों में बिजली विभाग के कारनामे से सबलोग वाकिफ हैं. कभी पोल से सटकर किसी की जान चली जाती है, तो कभी ओवर हेड वायर गिरने से किसी की मौत हो जाती है. अब एक नया मामला सामने आया है. जिसमें एक व्यक्ति की बिजली बिल देखते ही हार्ट अटैक से मौत हो गयी. जानकारी के मुताबिक फ्रेंचाइजी कंपनी के बाद बिजली विभाग ने भी मनमाने बिल का कारनामा शुरू किया है. यह कारनामा इस हद तक पहुंच गया कि बुधवार को एक बुजुर्ग को जान से हाथ धोना पड़ा. मधुसूदनपुर थानाक्षेत्र के नूरपुर पंचायत स्थित दुधेला मिर्जापुर नयाटोला में गैना लाल साह (80 वर्ष) की मौत बिजली बिल की मोटी रकम देखकर हो गयी. बिजली विभाग ने तीन माह का बिल 29 लाख रूपया भेज दिया, जिसे देखकर बृद्ध को हार्ट अटैक आ गया और उनकी मौत हो गयी. घरवालों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी. इस बाबत मधुसूदनपुर थाना प्रभारी नसीम खान ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. कर्मचारियों के विरुद्ध थाने में मामला दर्ज किया गया है.

बिल माफी का आवेदन दिया, फिर भी नहीं सुना

मृतक के बेटे रंगलाल साह ने बताया कि उनके पिता आटाचक्की चलाते थे. उन्होंने बिजली कनेक्शन लिया था. कुछ दिन पहले विभाग ने तीन माह का बिल 29 लाख भेज दिया. पिता ने बिजली विभाग जाकर बिल माफी के लिए आवेदन भी दिया था. बावजूद इसके अचानक बुधवार को बिजली विभाग के कर्मचारी घर पर आ धमके और तत्काल बिल भुगतान का दबाव पिता जी पर बनाने लगे. उन्होंने बिजली विभाग के कर्मचारी से बिल सही करने के लिए विभाग को आवेदन देने और सुधार होने पर बिल भुगतान कर देने की बात कही.

बिजली कनेक्शन काटने की चेतावनी दी

पिता के अनुरोध को मानने को कर्मचारी तैयार नहीं थे. एक तो बिजली विभाग के कर्मचारी नहीं माने, ऊपर से आग-बबूला हो गये. बिजली काटने व कार्रवाई की पिता को चेतावनी दे दी. सामाजिक प्रतिष्ठा हनन होने की बात पिता के दिल पर लग गयी और वे वहीं जमीन पर खड़े-खड़े गिर गये और बेहोश हो गये. इसके बाद दम तोड़ दिये. ऐसा होता देख सभी कर्मचारी मौके से फरार हो गये.

यह भी प ढ़ें-
पीडीएमसी व सीइओ की हुई खिंचाई, लगा "60 लाख का जुर्माना, एक माह में दिखाना होगा काम, वरना होगी छुट्टी

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

bhagalpur news. भागलपुर में विकसित होंगी राष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं, धोनी और ईशान किशन की राह पर निकलेंगे नये सितारे

bhagalpur news. पुलिया हटाने के विरोध मामले में जांच करने पहुंचे एसडीएम व नाथनगर विधायक

bhagalpur news. समय पर पूरा करें प्रखंड में संचालित योजनाएं

bhagalpur news. प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे व साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो - लोकभवन ने विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने दिया निर्देश- लोकभवन ने पत्र में कहा, निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायेवरीय संवाददाता, भागलपुरपीजी व कॉलेज में प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो. इसे लेकर लोकभवन के विशेष कार्य अधिकारी न्यायिक कल्पना श्रीवास्तव ने टीएमबीयू सहित सूबे के अन्य विश्वविद्यालयों में पत्र भेजा है. पत्र में विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है. विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार को लेकर सचिवालय ने विवि प्रशासन को सख्त रुख अपनाने के लिए कहा है. शिक्षकों के कार्यभार को लेकर जारी निर्देश में स्पष्ट कहा कि निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायी जाये.लोकभवन से जारी पत्र में कहा कि पूर्णकालिक कार्यरत सभी शिक्षकों को सेमेस्टर के दौरान प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनका साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो.शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह लागू रहेगापत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि न्यूनतम कार्यभार एक शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह यानी 180 कार्य दिवसों तक लागू रहेगा. साप्ताहिक 40 घंटे के कार्यभार को छह कार्य दिवसों में समान रूप से विभाजित करने का निर्देश दिया है. कहा कि यूजीसी के प्रावधानों में भी कार्यभार से संबंधित इसी तरह के मानदंड निर्धारित हैं. जिन्हें कानूनी मान्यता प्राप्त है. उनका पालन अनिवार्य है. उन मानकों को सख्ती से लागू कर बेहतर शैक्षणिक परिणाम सुनिश्चित करें.लोकभवन को मिली शिक्षकों के गायब रहने की शिकायतलोकभवन को शिक्षकों के गायब रहने की शिकायत मिल रही है. अंदरखाने की मानें, तो कुछ छात्र संगठन व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कॉलेज व पीजी विभागों में निर्धारित समय से पहले ही गायब रहने की शिकायत लोकभवन से की है. इसे लेकर कुलाधिपति सख्त होते दिख रहे है. ऐसे में कॉलेजों व पीजी विभाग का औचक निरीक्षण भी किया जा सकता है.ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी की नहीं होती है क्लासकॉलेज में ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी विषय की क्लास नहीं होती है. एक दिन पहले छात्र राजद के कार्यकर्ताओं ने एक कॉलेज के प्राचार्य से वार्ता के दौरान कहा था कि एमजेसी (ऑनर्स) विषय की क्लास होती है, लेकिन एमआइसी (सब्सिडियरी) विषय की क्लास नहीं होती है. छात्र संगठन का आरोप था कि एईसी, वीएसी व एसीसी की भी क्लास भी नहीं होती है.लोकभवन के निर्देश का हो रहा पालन - शिक्षक संगठनशिक्षक संगठन भुस्टा के महासचिव प्रो जगधर मंडल ले कहा कि लोकभवन के निर्देश का पालन हो रहा है. यूजीसी के नियमानुसार कॉलेज व पीजी विभागों में पांच घंटे तक शिक्षकों रहते हैं. सारा कार्य करते हैं. यह कोई नई बात नहीं है. शिक्षक लोकभवन के साथ है.

यह भी पढ़ें >