महिलाओं ने हर्षोल्लास के साथ मनाया अक्षय नवमी का व्रत

स्थानीय थाना क्षेत्र के महिलाओं ने गुरुवार को हर्षोल्लास के साथ अक्षय नवमी व्रत मनाया.

वाल्मीकिनगर. स्थानीय थाना क्षेत्र के महिलाओं ने गुरुवार को हर्षोल्लास के साथ अक्षय नवमी व्रत मनाया. महिलाओं के द्वारा धन-धान्य और सुख समृद्धि के लिए आंवला नवमी के शुभ अवसर पर आंवला के पेड़ में पीला रंग का धागा बांध कर पूजा अर्चना कर एक साथ भगवान श्री हरि विष्णु और भगवान शिव का पूजा अर्चना किया गया. आंवला नवमी को ही अक्षय नवमी के नाम से भी जाना जाता है. अक्षय नवमी का क्या है महत्व शास्त्रों के अनुसार कार्तिक मास में होने वाले देवउठनी एकादशी के 1 दिन पूर्व आंवला नवमी का व्रत मनाया जाता है. यह व्रत बहुत ही खास होता है. पं. कामेश्वर तिवारी की मानें तो आंवला नवमी के दिन आंवला के पेड़ में भगवान विष्णु के दर्शन होते हैं. इसलिए आंवला के पेड़ का खास पूजा किया जाता है. इससे उत्तम फल की प्राप्ति होती है. आंवले के पेड़ को विष्णु और शिव का प्रतीक मानकर की पूजा धर्म ग्रंथ के अनुसार मां लक्ष्मी को पृथ्वी भ्रमण के दौरान उनकी इच्छा हुई कि एक साथ भगवान विष्णु और शिव की पूजा की जाए. फिर उन्होंने सोचा कि दोनों देवों की पूजा एक साथ कैसे की जाए. तभी उनके मन में ख्याल आया कि भगवान विष्णु को तुलसी और भगवान शिव को बेल पसंद है और यह दोनों गुण आंवला में मौजूद है. यह सोचकर मां लक्ष्मी ने आंवले के पेड़ को विष्णु और शिव का प्रतीक मानकर पूजा की. पूजा करने के दिन नवमी था. इसलिए इस दिन को आंवला नवमी के रूप में जाना जाता है. पूजा से प्रसन्न होकर श्री हरि विष्णु और शिव प्रकट हुए. मां लक्ष्मी ने दोनों देवों को आंवले के पेड़ के नीचे भोजन बनाकर भोजन कराया. उसके उपरांत खुद भोजन की. तब से आंवला वृक्ष पूजन की परंपरा चली आ रही है. अगर आंवला के वृक्ष के नीचे खाना बनाकर खाना संभव नहीं हो तो इस दिन आंवला के फल का सेवन भी लाभकारी होता है. इस दिन आंवला के पेड़ के नीचे खाना बनाकर खाने से धन-धन्य और पुण्य फल की प्राप्ति होती है.

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By SATISH KUMAR

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