नरकटियागंज. अपने राजनैतिक रसूख के लिए चर्चित शिकारपुर इस्टेट घराने की चमक अब नरकटियागंज विधान सभा में फीकी पड़ने लगी है. विधानसभा चुनाव 2025 के सरगर्मी भरे माहौल में शिकारपुर इस्टेट घराने की सियासी पकड़ इस बार कमजोर पड़ती दिख रही है. कभी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने वाला यह घराना अब अंदरूनी खींचतान और संगठनात्मक दबाव के चलते सुर्खियों में है. गुरुवार को इस्टेट घराने से दो अहम चेहरे रश्मि वर्मा और इनके जेठ विनय वर्मा ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जिससे स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. भाजपा सांसद डॉ. संजय जायसवाल की पहल और संगठन के दबाव में रश्मि वर्मा ने अपना नामांकन वापस ले लिया. वहीं, कांग्रेस के पर्यवेक्षक हरीश पवार की बढ़ती सक्रियता और पार्टी नेतृत्व के संकेत के बाद विनय वर्मा ने भी मैदान छोड़ दिया. बताया जाता है कि पिछले कुछ दिनों से इस्टेट परिवार के भीतर टिकट को लेकर भारी असंतोष था, जिसका असर अब खुले तौर पर दिखने भी लगा था. यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने इस बार टिकट देने में किनारा कर लिया. एक समय था जब नरकटियागंज की राजनीति में शिकारपुर इस्टेट घराने का दबदबा अटूट माना जाता था. नगर निकाय से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक हर चुनाव में परिवार का किसी न किसी सदस्य का सक्रिय दखल रहा. मगर इस बार हालात उलटे है. बता दें कि वर्ष 2010 में आरक्षीत सीट हटने के बाद नरकटियागंज विधान सभा अस्तित्व में आया. वर्ष 2010 के चुनाव में सतीश चन्द्र दुबे भाजपा से जीते. लेकिन 2014-में हुए उप चुनाव में रश्मि वर्मा को भाजपा ने टिकट दिया और वें विधायक बनी. वर्ष 2015- विनय वर्मा कांग्रेस से विधायक चुने गए और फिर 2020 में रश्मि वर्मा विधायक बनीं. ————– कांग्रेस और राजद के बीच दोस्ताना लड़ाई! नरकटियागंज में महागठबंधन के घटक दलों राजद और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं. शुक्रवार को नामांकन वापसी के अंतिम दिन उम्मीद था कि कोई नामांकन वापस ले सकता है, लेकिन किसी ने नाम वापस नहीं लिया है. ऐसे में कांग्रेस के शाश्वत केदार और राजद के दीपक यादव दोनों यहां से उम्मीदवार हैं. जिन्हें चुनाव चिन्ह भी आवंटित कर दिया गया है.
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