वरीय संवाददाता, बेतिया
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) को कभी बिहार में बाघों की वापसी की सबसे बड़ी सफलता की कहानी माना गया. जंगलों में बढ़ती हलचल, कैमरा ट्रैप में कैद होती दहाड़ें और पर्यटकों का उत्साह सब कुछ इस बात का संकेत था कि संरक्षण की कोशिशें रंग ला रही हैं, लेकिन इसी सफलता के पीछे एक चिंताजनक सच्चाई बाघों की असामयिक मौतें भी है.
आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2000 से 2025 तक कुल 25 बाघों की मौत हुई थी, 26वें वर्ष की शुरूआत में एक और बाघ की मौत से अब वीटीआर में बाघों के संरक्षण पर सवाल उठने लगे हैं. सवाल यह भी है कि वीटीआर में बाघों के संरक्षण के लिए तमाम तामझाम हैं, बावजूद इसके तीन साल में बिजली करंट से बाघ के मौत का दूसरा मामला सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है. पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि वीटीआर में बाघों की सुरक्षा अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है. रिकार्ड बताते हैं कि जनवरी 2021 में वाल्मीकि क्षेत्र में एक नर बाघ जाल में फंस गया, जिससे उसकी दर्दनाक मौत हो गई. यह घटना जंगल से सटे इलाकों में अवैध शिकार के खतरों की ओर इशारा करती है. इसके तुरंत बाद फरवरी 2021 में रिजर्व क्षेत्र में एक बाघिन की इलाज के दौरान मौत हो गई. अक्टूबर 2021 में जंगल के अंदर आपसी क्षेत्रीय संघर्ष में एक बाघ मारा गया. विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे-जैसे बाघों की संख्या बढ़ती है, उनके बीच इलाकों को लेकर टकराव भी बढ़ता है. सीमित क्षेत्र में बढ़ती आबादी कई बार जानलेवा साबित होती है. साल 2022 भी राहत भरा नहीं रहा. मार्च 2022 में वीटीआर इलाके में एक बाघ शावक मृत पाया गया. अक्टूबर 2022 में मानव-आक्रांत घोषित एक बाघ की नियंत्रण कार्रवाई के दौरान मौत हो गई. हालिया घटनाएं भी कम चिंताजनक नहीं हैं. फरवरी 2023 में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल से एक रॉयल बंगाल टाइगर का शव बरामद हुआ. मौत के कारणों की जांच भले चलती रही हो, लेकिन बार-बार शव मिलने की घटनाएं यह साफ करती हैं कि जंगल के भीतर और बाहर दोनों तरफ खतरे मौजूद हैं. वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि अब केवल संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि आवास विस्तार, सुरक्षित कॉरिडोर, सीमा क्षेत्रों में कड़ी निगरानी और स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर ध्यान देना होगा.
————–मौत से जूझते बाघ की गर्जना से दहल उठा था इलाका!
मैनाटांड़. मानपुर थाना क्षेत्र के पुरैनिया गांव के पश्चिम में बुधवार को दोरहम नदी के तट पर विजय साह के गेहूं के खेत में मृत बाघ मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है. ग्रामीणों का कहना है कि बाघ खेत में मौत से लड़ते हुए बाघ की गर्जना से पूरा इलाका दहल उठा था. सुबह में ग्रामीण जब शौच के लिए निकले तो खेत में बाघ देख सहम गये, लेकिन बाघ के शरीर में कोई हलचल नहीं देख सभी तुरंत गांव में इसकी सूचना दी. मौके पर सरपंच संजय दिसवा सहित कई ग्रामीण पहुंच गए और पुलिस तथा वन विभाग को सूचित किया. ग्रामीणों ने बताया कि बाघ का आकार बहुत बड़ा था और इलाके में भय का माहौल फैल गया था.
—————–हाल के वर्षों में कब-कब मरे बाघ
जनवरी 2021: वाल्मीकि क्षेत्र में जाल में फंसने से एक नर बाघ की मौत
फरवरी 2021: रिजर्व क्षेत्र में इलाज के दौरान एक बाघिन की मौत
अक्टूबर 2021: जंगल के अंदर आपसी क्षेत्रीय संघर्ष में एक बाघ मरा
मार्च 2022: वीटीआर इलाके में एक बाघ शावक मृत पाया गया
अक्टूबर 2022: मानव-आक्रांत घोषित बाघ की नियंत्रण कार्रवाई में मौत
फरवरी 2023: वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल से एक रॉयल बंगाल टाइगर का शव बरामद
फरवरी 2023: वाल्मीकिनगर के रमपुरवा गांव के पास करंट से मारा गया बाघ
2024: मंगुराहा वन क्षेत्र में बाघ की मौत (संभावित संघर्ष/सुरक्षा चूक)
2024: मानपुर वन क्षेत्र में बाघ की मौत (संभावित संघर्ष/सुरक्षा चूक)
2025: वीटीआर के विभिन्न हिस्सों में अब तक तीन बाघों की मौत, ज्यादातर आपसी संघर्ष और सुरक्षा चूक के कारण
जनवरी 2026: मानपुर वन क्षेत्र में करंट से बाघ की मौत
