Missing Woman Found: फिल्मों में बिछड़े अपनों के मिलन की कहानियां अक्सर पर्दे पर दिखाई जाती हैं. लेकिन बेतिया में शुक्रवार को ऐसा ही एक दृश्य हकीकत में देखने को मिला. वर्ष 2017 में लापता हुई सुषमा नौ साल बाद जब अपने पति मनोज गिरी के सामने पहुंचीं, तो दोनों की आंखों से निकले आंसुओं ने वर्षों की दूरी को पलभर में मिटा दिया.
वर्ष 2017 में अचानक लापता हुई सुषमा के घर लौटने की उम्मीद परिवार ने लगभग छोड़ दी थी. लेकिन शुक्रवार को बेतिया के सखी वन स्टॉप सेंटर में ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला, जब 9 साल बाद सुषमा अपने पति मनोज गिरी के सामने थीं. दोनों एक-दूसरे को देखते ही भावुक हो गए और उनकी आंखें भर आईं.
सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद सुषमा को उनके पति के सुपुर्द कर दिया गया. यह प्रक्रिया वरीय उप समाहर्ता-सह-नोडल पदाधिकारी रोचना माद्री की मौजूदगी में पूरी हुई.
कर्नाटक से मिली सूचना, वीडियो कॉल से हुई पहचान
सखी वन स्टॉप सेंटर की केन्द्र प्रशासक रश्मि कुमारी ने बताया कि कर्नाटक के वन स्टॉप सेंटर से सूचना मिली थी कि वहां सुषमा नाम की एक महिला रह रही हैं, जो केवल अपने पति और गांव का नाम बता पा रही थीं.
इसके बाद गोपालपुर थाना की मदद से पहचान का सत्यापन कराया गया. फरवरी 2026 में मनोज गिरी को बेतिया बुलाकर वीडियो कॉल कराई गई. स्क्रीन पर पत्नी को देखते ही उन्होंने उनकी पहचान कर ली और उन्हें सुरक्षित घर लाने की अपील की.
2017 में अचानक घर से चली गई थीं
सिकटा प्रखंड के विशम्भरा गांव निवासी मनोज गिरी ने बताया कि उनकी शादी वर्ष 2005 में सुषमा से हुई थी.
उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में सुषमा एक बच्चे को लेकर अचानक घर से चली गई थीं. उस समय परिवार में चार बच्चे थे और सुषमा गर्भवती भी थीं. काफी तलाश के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिला. धीरे-धीरे परिवार ने मान लिया था कि शायद अब वह इस दुनिया में नहीं हैं.
प्रशासनिक समन्वय से संभव हुआ पुनर्मिलन
रोचना माद्री ने कहा कि सखी वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य संकटग्रस्त महिलाओं को सुरक्षा देने के साथ उन्हें सम्मानपूर्वक उनके परिवार से जोड़ना भी है.
उन्होंने इस पूरे मामले को प्रशासनिक संवेदनशीलता और मानवीय प्रयासों का बेहतर उदाहरण बताया.
दो बेटियां अभी कर्नाटक में, उन्हें भी परिवार से मिलाने की तैयारी
रश्मि कुमारी ने बताया कि कर्नाटक के उडुपी स्थित स्टेट होम फॉर वूमन के समन्वय से सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर सुषमा को पश्चिम चंपारण लाया गया.
उन्होंने बताया कि सुषमा की दो बेटियां फिलहाल कर्नाटक की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की देखरेख में हैं. उन्हें भी जल्द परिवार से मिलाने की प्रक्रिया चल रही है.
नौ साल बाद बिखरे परिवार के इस पुनर्मिलन ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया. वर्षों से इंतजार कर रहे परिवार के चेहरे पर आखिरकार मुस्कान लौट आई.
