Bettiah News: पश्चिम चंपारण के सांसद एवं दक्षिण एशियाई संसदीय मंच (SARPF) के अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल 12 से 17 जुलाई तक सिंगापुर के अध्ययन दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने भारत सहित दक्षिण एशिया के विभिन्न देशों के सांसदों के साथ जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, हरित वित्तपोषण और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आयोजित कई उच्चस्तरीय बैठकों में भाग लिया.
सिंगापुर के पर्यावरण मॉडल का किया अध्ययन
दौरे के पहले दिन प्रतिनिधिमंडल ने सिंगापुर के पर्यावरण एवं सतत विकास मंत्रालय में आयोजित बैठक में भाग लिया. यहां ग्रीन प्लान, वर्ष 2050 तक नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य और सतत विकास की नीतियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई. इसके बाद मरीना बैराज और सस्टेनेबल सिंगापुर गैलरी का भ्रमण कर जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण के मॉडल का अध्ययन किया गया.
ऊर्जा सुरक्षा और हरित वित्तपोषण पर हुई चर्चा
प्रतिनिधिमंडल ने नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (NTU) स्थित एनर्जी रिसर्च इंस्टीट्यूट में स्वच्छ ऊर्जा और डी-कार्बोनाइजेशन पर विशेषज्ञों से चर्चा की. वहीं नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS) में आयोजित गोलमेज बैठक में क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु नीति पर विचार-विमर्श किया गया. इसके अलावा सिंगापुर के मौद्रिक प्राधिकरण (MAS) में हरित वित्तपोषण और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई.
दक्षिण एशियाई सहयोग पर दिया जोर
दौरे के दूसरे दिन डॉ. संजय जायसवाल ने दक्षिण एशियाई संसदीय मंच के अध्यक्ष के रूप में भारत, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका के सांसदों के साथ सिंगापुर के प्रधानमंत्री कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की. बैठक में जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय चुनौतियों और दक्षिण एशिया के लिए साझा रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई.
सांसद ने क्या कहा
डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि दक्षिण एशिया में ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन से निपटने, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और सतत विकास के लिए क्षेत्रीय सहयोग समय की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि भारत और सिंगापुर के बीच ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और ज्ञान साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में यह अध्ययन दौरा भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा.
यह भी पढ़ें: रांगी नदी में डूबने से किशोर की मौत, गांव में पसरा मातम
