चंपारण के लाल रहे अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त योगी, संन्यासी जूना अखाड़ा के वरिष्ठ महामण्डलेश्वर स्वामी अर्जुन पुरी जी महाराज (बालयोगी बाबा) अब हमारे बीच नहीं रहे.
By DIGVIJAY SINGH | Updated at :
नरकटियागंज . चंपारण के लाल रहे अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त योगी, संन्यासी जूना अखाड़ा के वरिष्ठ महामण्डलेश्वर स्वामी अर्जुन पुरी जी महाराज (बालयोगी बाबा) अब हमारे बीच नहीं रहे. उत्तरायण मौनी अमावस्या के पावन योग में उन्होंने हरिद्वार में देह त्याग कर ब्रह्मलीन होना स्वीकार किया. उनके महाप्रयाण से देश-विदेश में फैले सनातन अनुयायियों में शोक की लहर दौड़ गई है. चंपारण में उनके ब्रह्मालीन होने के बाद शोक की लहर दौड़ गयी है.बताया जाता है कि आज से करीब आठ दशक पूर्व चंपारण की पावन धरती मझौलिया थाना बखरिया गांव निवासी त्रिभुखल पांडेय और गिरजा देवी के पुत्र के रूप में बचपन से ही सांसारिक बंधनों से विरक्ति थी. अल्पायु में ही उन्होंने माता-पिता, घर-परिवार और भौतिक मोह-माया का परित्याग कर संन्यास का मार्ग चुन लिया. बाल्यकाल में ही योग और तपस्या के प्रति उनका झुकाव इतना गहरा था कि उन्हें बालयोगी बाबा के नाम से जाना जाने लगा.संन्यास ग्रहण करने के उपरांत उन्होंने गंगा के पावन तट हरिद्वार को अपनी साधना-स्थली बनाया. उनकी आध्यात्मिक साधना और सनातन धर्म के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें भारत के सुविख्यात संन्यासी जूना अखाड़ा द्वारा वरिष्ठ महामण्डलेश्वर की गरिमामयी उपाधि से अलंकृत किया गया था.
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