ऑनलाइन पेमेंट नहीं होने से पर्यटक परेशान, पर्यटकों को होती है परेशानी

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व पर्यटन के मामले में आज दुनिया के पटल पर बेहतरीन प्राकृतिक और नैसर्गिक सुंदरता के समावेश से ख्याति बटोर रहा है.

वाल्मीकिनगर. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व पर्यटन के मामले में आज दुनिया के पटल पर बेहतरीन प्राकृतिक और नैसर्गिक सुंदरता के समावेश से ख्याति बटोर रहा है. जिसके दीदार की लालसा लिए हर रोज सैकड़ों की संख्या में पर्यटक देश सहित विदेशों से पहुंचते है और जल, जंगल, हरियाली, दर्शनीय स्थल और पहाड़ और जंगल में निवास करने वाले विभिन्न प्रकार के शाकाहारी, मांसाहारी जीव जंतुओं के साथ कीड़े-मकोड़े और पक्षियों का समीप से दीदार करते हैं और लुत्फ उठाते हैं. वैसे पर्यटक जो ऑनलाइन बुकिंग नहीं कर पाते हैं और वह वन विभाग के जंगल कैंप स्थित नियंत्रण कक्ष पहुंचते हैं और जंगल सफारी की चाह रखते हैं किंतु उनके पास कैश नहीं होता. वैसे पर्यटकों को जो ऑनलाइन पेमेंट करना चाहते हैं किंतु वन विभाग द्वारा ऑनलाइन पेमेंट का विकल्प नहीं होने के कारण वे पेमेंट नहीं कर पाते हैं और उन्हें एटीएम की तलाश में गोल चौक और टंकी बाजार तक 2 से 3 किलोमीटर जाना पड़ता है. कभी-कभी एटीएम में पैसे नहीं होने पर उन्हें दुकानदारों के स्कैनर में पेमेंट देकर कैश लेना पड़ता है. जिसके लिए उन्हें सुविधा शुल्क भी देना पड़ता है. बताते चलें कि पर्यटन पर आए पर्यटक सफारी और आवासन का ऑनलाइन बुकिंग कर यहां पहुंचते है. साथ ही जंगल सफारी का लुत्फ ऑनलाइन और ऑफलाइन बुक करा कर करते हैं. परंतु विडंबना है कि वाल्मीकिनगर पहुंच कर पर्यटक ऑनलाइन पेमेंट से महरूम हो जाते हैं. कारण है कि अब तक वन प्रशासन द्वारा ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा बुकिंग काउंटर पर पर्यटकों के लिए मुहैया नहीं कराया गया है. जिससे जो पर्यटक कैश लेकर नहीं पहुंचते हैं, उन्हें पेमेंट देने के लिए सीएसपी या एटीएम पर जाना होता है. जिससे पर्यटकों को खासी परेशानी होती है. कई पर्यटक तो कैश के अभाव में पर्यटन का लुत्फ भी नहीं उठा पाते. वन प्रशासन को चाहिए कि अति शीघ्र ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा बहाल करें. ताकि पर्यटक इसका फायदा उठा सकें. इस बाबत वाल्मीकिनगर रेंजर अमित कुमार ने बताया कि पर्यटकों के लिए जंगल सफारी और रूम बुकिंग की सुविधा ऑनलाइन उपलब्ध है, हां पर्यटकों के लिए जंगल कैंप परिसर में ऑनलाइन पेमेंट सुविधा का विकल्प नहीं है. शीघ्र ही पर्यटकों के लिए सुविधा बहाल की जाएगी. हालांकि वन विभाग के द्वारा वाई-फाई उपलब्ध कराया गया है.

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Author: SATISH KUMAR

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