बेतिया. अखंड सौभाग्य का पर्व करवा चौथ 10 अक्तूबर शुक्रवार को है. इसको लेकर महिलाओं में काफी उत्सुकता है. बाजार में रौनक बढ़ गयी हैं. ज्वेलरी, साड़ी, चूड़ी, लहठी की खरीदारी जोरों पर है, चारों ओर करवा चौथ से जुड़ी सामग्रियों का बाजार सज गया है. सोलह श्रृंगार की खरीदारी में जुटी शहर की महिलाएं महिलाएं पूजन सामग्री के साथ-साथ सोलह श्रृंगार और परिधानों की खरीदारी में जुट गई हैं. साथ ही करवा चौथ स्पेशल मेहंदी की भी प्री बुकिंग हो रही है. नवविवाहितों में पहला करवाचौथ को लेकर खासा उत्साह है, वे नयी नवेली दुल्हन की तरह सजकर चंद्रदेव को अर्घ्य देने के लिए बेताब है. करवाचौथ को लेकर आभूषण दुकानों में भी रौनक है. शहर के हजारीमल धर्मशाला व सुप्रिया रोड स्थित नंदनी ज्वेलर्स में आकर्षक डिजाइनों में इयर रिंग, नोज रिंग. मांग टीका, पेंडेंट, चेन, पायल, बिछिया, पाजेब उपलब्ध हैं. जिसे पतियों द्वारा अपनी अर्धांगिनी को गिफ्ट देने के लिए खरीदा जा रहा है. इसके अलावा लाल बाजार स्थित बहुरानी शॉपी व त्रिमूर्ति चौक स्थित पीतांबरी साड़ी शो रूम में खरीदारी के लिए महिलाओं की भीड़ उमड़ रही हैं. शाम 8 बजे के लगभग चंद्रोदय का समय हिन्दू पंचांग के अनुसार, कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 09 अक्तूबर को रात 10 बजकर 54 मिनट पर शुरू होगी. शहर के पंडित हरिशंकर मिश्रा ने बताया कि व्रत का समापन अगले दिन यानी 10 अक्टूबर को रात 07 बजकर 37 मिनट पर होगा. ऐसे में करवा चौथ व्रत 10 अक्तूबर को रखा जायेगा. करवाचौथ का चांद रात में 8 बजकर 13 मिनट पर निकलेगा. उन्होंने बताया कि इसी समय व्रती चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपना व्रत खोल सकती हैं. महिलायें परंपरा के अनुसार, पूजन पाठ करें. चंद्रदेव को अर्घ्य देकर अखंड सुहाग की कामना करें. चांद देख पति के हाथ से पानी पीने की परंपरा पंजाबी समुदाय में इस पर्व की विशेष परंपरा है. पंजाबी समुदाय में सास सुबह में अपनी बहू को सरही कराती है. वहीं नवविवाहितों में चूड़ा और उम्रदराज महिलाओं में लाल चूड़ी पहनने की परंपरा है. शाम में पूजा के समय सात बार थाली घुमाने की परंपरा है. पूजा के बाद चांद को अर्ध्य देकर व्रती महिलायें चलनी से पति को देखती है और पति के हाथ से पानी पीकर व्रत तोड़ती है. वहीं अन्य समुदायों में भी कुछ वर्षों से करवाचौथ मनाने की परंपरा ने जोर पकड़ा है. अन्य समुदायों की महिलायें चांद को अर्ध्य देने के पश्चात व्रत तोड़ने की परंपरा है.
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