Bettiah News: योगापट्टी. एक तरफ बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं देने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं पश्चिम चंपारण जिले के योगापट्टी प्रखंड स्थित लक्षनौता में बच्चे घास-फूस और करकट से बनी झोपड़ी में पढ़ने को मजबूर हैं. राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय के दो कमरे पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं. ऐसे में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों की पढ़ाई अस्थायी झोपड़ी में करायी जा रही है. विद्यालय की जमीन उपलब्ध होने के बावजूद अतिक्रमण के कारण नए भवन का निर्माण वर्षों से अटका हुआ है.
Yogapatti News: दो कमरे जर्जर, झोपड़ी बनी कक्षा
राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय लक्षनौता के प्रभारी प्रधानाध्यापक नुरुल होदा ने बताया कि विद्यालय के दोनों जर्जर कमरों में पठन-पाठन बंद कर दिया गया है. वर्तमान में एक भी सुरक्षित पक्का शिक्षण कक्ष उपलब्ध नहीं है.
गर्मी, बारिश और ठंड के मौसम में भी बच्चों को अस्थायी झोपड़ी में ही पढ़ाई करनी पड़ती है. इससे बच्चों के साथ शिक्षकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
स्कूल की जमीन है, लेकिन अतिक्रमण में
विद्यालय की कुल 2 कट्ठा 19 धूर जमीन राज्यपाल के नाम से दर्ज है. इसमें करीब एक कट्ठा जमीन पर अतिक्रमण कर झोपड़ी बना ली गयी है.
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार यही अतिक्रमण नए भवन के निर्माण में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है. प्रधानाध्यापक ने बताया कि अतिक्रमण हटाने के लिए अधिकारियों को कई बार आवेदन दिया जा चुका है और कार्रवाई का आदेश भी हो चुका है, लेकिन अब तक कब्जा नहीं हटाया गया.
मापी के बाद भी नहीं हटा कब्जा
विद्यालय की जमीन की अमीन से मापी भी करायी जा चुकी है. इसके बावजूद अतिक्रमण की समस्या बनी हुई है. अंचलाधिकारी न्यायालय में वाद संख्या 01/2016-17 अब भी प्रक्रियाधीन बताया गया है.
प्रधानाध्यापक के अनुसार मामले की जानकारी जिलाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचलाधिकारी तक दी जा चुकी है.
बारिश में जलजमाव, सड़क भी जर्जर
बारिश के दिनों में विद्यालय परिसर में जलजमाव की समस्या रहती है. इससे सांप, मच्छर और अन्य जहरीले कीड़ों का खतरा बना रहता है.
विद्यालय में शौचालय की समुचित व्यवस्था नहीं है. पेयजल स्थल के आसपास भी गंदगी रहने की शिकायत है. वहीं स्कूल के सामने की जर्जर सड़क से बच्चों और अभिभावकों की परेशानी और बढ़ जाती है.
शिक्षकों ने अपने खर्च से बनाया अस्थायी सहारा
बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बंद न हो, इसके लिए शिक्षकों ने निजी सहयोग से सीमेंट, करकट और घास-फूस जुटाकर अस्थायी झोपड़ी तैयार करायी है.
ग्रामीणों का कहना है कि जर्जर भवन कभी भी हादसे का कारण बन सकता है. उन्होंने प्रशासन से जल्द अतिक्रमण हटाकर नया स्कूल भवन बनवाने और विद्यालय में शौचालय, पेयजल व अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है.
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