गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षकों के कम्पलेन को शून्य के स्तर पर लाना अनिवार्य: डॉ.बी राजेंदर

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समृद्धि यात्रा में शामिल रहे शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ बी राजेंदर ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का विस्तृत निरीक्षण किया.

By SATISH KUMAR | January 16, 2026 8:55 PM

रवि रंक, बेतियामुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समृद्धि यात्रा में शामिल रहे शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ बी राजेंदर ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का विस्तृत निरीक्षण किया. इसके बाद अपराह्न तीन से करीब चार बजे तक तिरहुत प्रमंडल के शिक्षा उप निदेशक, जिला शिक्षा अधिकारी, डीपीओ, बीइओ गण और शिक्षा कर्मियों की बैठक की.

बैठक में कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को धरातल पर प्रभावी बनाने के लिए शिक्षक-शिक्षिकाओं से जुड़ी शिकायतों और समस्याओं को शून्य स्तर तक लाना अनिवार्य है.अपर मुख्य सचिव ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता तभी सुधरेगी, जब शिक्षक निश्चिंत होकर अध्यापन कार्य करें और उनकी प्रशासनिक व सेवा संबंधी शिकायतों का समयबद्ध समाधान हो. उन्होंने जिला शिक्षा कार्यालय एवं सभी प्रखंड शिक्षा कार्यालयों के पूर्ण डिजिटलाइजेशन पर जोर देते हुए कहा कि अभिलेखों का सुव्यवस्थित रख-रखाव के साथ पारदर्शितापूर्ण जवाबदेही हम सबकी पहली जवाबदेही है.इसके लिए प्राप्त आवेदनों का पारदर्शी निष्पादन के साथ पुराने अभिलेखों के सुरक्षित रख रखाव करना जरूरी दिखा है. अपर मुख्य सचिव डॉ राजेंदर ने जिला से लेकर प्रखंड शिक्षा कार्यालयों के डिजिटलाइजेशन करने और अचूक रूप से ऑनलाइन रिकॉर्ड संधारण का आदेश दिया. बैठक में डॉ. राजेंदर ने प्रखंड शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट टास्क देते हुए निर्देशित किया कि वे प्रतिदिन न्यूनतम पांच विद्यालयों का भौतिक निरीक्षण अनिवार्य रूप से करें. निरीक्षण के दौरान विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम की स्थिति, छात्रों की उपस्थिति, शिक्षकों की नियमितता, आधारभूत सुविधाओं और शैक्षणिक वातावरण की गहन समीक्षा की जाए. निरीक्षण प्रतिवेदन ऑनलाइन अपलोड करने तथा कमियों के त्वरित निराकरण के भी निर्देश दिए गए. उन्होंने यह भी कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में सुस्ती, अनावश्यक पत्राचार और लंबित मामलों से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है. इसलिए जिला एवं प्रखंड स्तर के सभी अधिकारी समयबद्धता और समन्वय के साथ कार्य करें. बैठक में विभागीय योजनाओं, छात्र हित से जुड़े कार्यक्रमों और शिकायत निवारण प्रणाली की भी समीक्षा की गई. अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि शिक्षा विभाग का लक्ष्य केवल नामांकन बढ़ाना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण, जवाबदेह और परिणामोन्मुख शिक्षा सुनिश्चित करना है. इसके लिए प्रशासनिक स्तर से लेकर विद्यालय स्तर तक सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी.

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