बगहा. बगहा स्थानीय रेलवे स्टेशन पर बुधवार की सुबह एक हृदयविदारक दृश्य देखने को मिला. जिसने हर किसी को भावुक कर दिया. एक शराबी पिता ने अपनी तीन मासूम संतानों को प्लेटफार्म पर छोड़ दिया और निर्दयता से कहा यहीं मांग कर खाना. इसके बाद वह बच्चों को बेसहारा छोड़कर कहीं गायब हो गया. सौभाग्य से मौके पर मौजूद आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) ने तीनों बच्चों को समय रहते संभाल लिया और सुरक्षित संरक्षण में पहुंचाया.बता दे कि घटना सुबह करीब 9:50 बजे की है.आरपीएफ पोस्ट प्रभारी इंद्रजीत सिंह अपने सहयोगी कांस्टेबल उमेश यादव और कांस्टेबल राजेश कुमार के साथ स्टेशन पर भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था की ड्यूटी पर थे.गश्त के दौरान प्लेटफार्म संख्या- 1 के पूर्वी छोर पर तीन छोटे-छोटे बच्चे रोते हुए दिखे बगहा रेलवे स्टेशन पर फूट-फूट कर रो पड़े बच्चे आरपीएफ कर्मियों ने जब बच्चों से उनका हाल पूछा तो वे फूट-फूट कर रो पड़े. बच्चों ने बताया कि उनकी मां की मृत्यु हो चुकी है और पिता नंदकिशोर साह शराब के आदी हैं. पिता ने खेत और घर बेच दिए, और फिर तीनों को रेलवे स्टेशन पर लाकर छोड़ दिया. अब यहीं रहो और मांग कर खाओ,”और फिर कहीं चले गये पिता बच्चों ने बताया कि जाते-जाते पिता ने कहा, “अब यहीं रहो और मांग कर खाओ,” और फिर कहीं चले गए. तीनों बच्चों की पहचान इस प्रकार हुई-कुसुम कुमारी उम्र 8 वर्ष,सत्या कुमार उम्र 7 वर्ष, सूर्य कुमार उम्र 6 वर्ष,इनके पिता नंदकिशोर साह, निवासी कोईरिया टोला डुमवलिया,वार्ड संख्या 13, थाना पटखौली, जिला पश्चिमी चंपारण (बिहार) बताए गए हैं. आरपीएफ जवानों की मानवीय पहल की, चारों ओर सराहना बच्चों की हालत देखकर आरपीएफ जवानों ने तुरंत चाइल्ड लाइन नरकटियागंज को सूचना दी.सूचना मिलते ही केस वर्कर सालमगीर आलम और शीला गुप्ता बगहा पहुंचे.उन्होंने आरपीएफ की मौजूदगी में तीनों बच्चों को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया और सुपुर्दगी नामे की प्रक्रिया पूरी की.आरपीएफ के इस मानवीय पहल की चारों ओर सराहना की जा रही है. स्थानीय लोगों ने आरपीएफ कर्मियों की तत्परता और संवेदनशीलता की प्रशंसा करते हुए कहा कि अगर समय पर बच्चों को नहीं संभाला जाता. तो उनके साथ कोई अनहोनी हो सकती थी. पुलिस अब बच्चों के पिता नंदकिशोर साह की तलाश में जुट गई आरपीएफ पोस्ट प्रभारी इंद्रजीत सिंह ने बताया कि बच्चों को सुरक्षित रूप से चाइल्ड लाइन के हवाले कर दिया गया है. ताकि आगे की कानूनी और सामाजिक प्रक्रिया पूरी की जा सके. वहीं, पुलिस अब बच्चों के पिता नंदकिशोर साह की तलाश में जुट गई है. मानवता के इस मार्मिक प्रसंग ने एक ओर जहां समाज की बेरुखी को उजागर किया है. वहीं दूसरी ओर आरपीएफ के संवेदनशील रवैये ने मानवता की मिसाल पेश की है.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
