बगहा. बगहा-छितौनी रोड निर्माण के दौरान 27 वर्ष पहले हुए मुंशी टीपू हत्याकांड में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्रा की कोर्ट ने मंगलवार को संवेदक गुड्डू गुप्ता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. सजा के साथ ही एक लाख का जुर्माना लगाया गया. नहीं देने पर अतिरिक्त छह माह का सजा भुगतना होगा और दोषी करार होने के दिन ही सुनवाई के बाद जेल भेज दिया गया था.इस आशय की जानकारी देते हुए लोक अभियोजक जितेन्द्र भारती ने बताया कि फैसला एक को होना था.लेकिन अभियुक्त की तबीयत खराब हो जाने के कारण तिथि टाल कर 04 सितंबर तय किया गया था. गुरुवार को दोषी करार देने के साथ ही सजा के बिन्दु पर सुनवाई के लिए 09 सितंबर की तिथि तय की गयी थी. जिसमें मंगलवार को सजा सुनाई गई. इधर पीड़ित के अधिवक्ता राकेश पांडेय ने बताया कि संवेदक गुड्डू गुप्ता का निर्णय आने तक न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया था. आज सजा सुनाई गई. आखिरकार पीड़ित को न्याय मिल ही गया गौरतलब है कि दोनों पक्ष से अपना-अपना साक्ष्य और सबूत कोर्ट को दिया जा चुका था.अंतिम सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता सत्येंद्र मिश्रा ने कोर्ट को बताया था कि इस कांड का सूचक विपिन सिंह ही था और पुलिस ने उसे ही अभियुक्त बना दिया. पुलिस असल कातिल तक नहीं पहुंची तो बिना साक्ष्य के आरोपित कर दिया. इस केस में 09 साक्षी पक्षद्रोही हो चुके हैं. पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर, केस की जांच करने वाले पुलिस अधिकारी तक कोर्ट में नहीं आए. मृतक की मां ट्रायल के दौरान ही मर गयी, वह साक्ष्य देने नहीं आई इस कांड में कोई चश्मदीद नहीं है. किसी ने यह नहीं देखा कि हत्या किसने किया.अन्य साक्षी मृतक के मां और दोनों भाई है.जिन्होंने घटना घटित होते देखा ही नहीं है. मृतक की मां ट्रायल के दौरान ही मर गयी.वह साक्ष्य देने नहीं आई. पुलिस ने अपने अनुसंधान मे गुड्डू गुप्ता को निर्दोष पाया था.अभियुक्त गुड्डू गुप्ता घटनास्थल पर उपस्थिति भी नहीं था. अभियुक्त गुड्डू गुप्ता एवं मृतक मे कोई दुश्मनी नही थी. राजनीतिवश गुड्डू गुप्ता को आरोपी बना दिया गया. प्लानिंग के तहत सूचक विपिन कु. सिंह व ठेकेदार गुडू गुप्ता ने घर से बुलाकर ले जाकर हत्या किया अभियोजन पदाधिकारी जितेंद्र भारती ने कोर्ट को बताया कि इस केस में प्लानिंग के तहत कांड के सूचक विपिन कुमार सिंह और ठेकेदार गुडू गुप्ता ने घर से बुलाकर ले जाकर हत्या किया और घटनाक्रम को मोड़ते हुए दूसरे के मध्य करने की कोशिश की गई है. इन लोगों के प्रभाव के कारण कई साक्षी पक्ष द्रोही हो गए. दोनों तरफ के बहस को सुनने के बाद कोर्ट ने 01 सितंबर को तिथि मुकर्रर की है. उस दिन कोर्ट का फैसला आ सकता था.इस कांड पर बगहा चम्पारण के लोगों की नजर भी टिकी हुई थी और आखिरकार पीड़ित परिजनों को इंसाफ मिल ही गया. पीड़ित परिवार के लोगों में खुशी है. इस मामले को देखने के लिए बगहा न्यायालय परिसर लोगो की भीड़ उमड़ पड़ी थी की क्या फैसला आने वाला है.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
