भैया दूज पर गोवर्धन पूजा धूमधाम से संपन्न, शादी-विवाह की हुई शुरुआत

रामनगर समेत ग्रामीण क्षेत्रों में भैया दूज का पर्व हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया.

रामनगर/वाल्मीकिनगर. रामनगर समेत ग्रामीण क्षेत्रों में भैया दूज का पर्व हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया. इस अवसर पर महिलाओं और युवतियों ने उत्साहपूर्वक गोवर्धन पूजा की. सुबह से ही घर-आंगन की सफाई कर पहले से निर्धारित जगह पर गोबर से गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाकर विधिवत पूजा-अर्चना की गयी. पारंपरिक गीतों और लोक धुनों के बीच पूजा की गयी. घर आकर बहनों ने अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाया और उनकी लंबी आयु, सुख-समृद्धि व उन्नति की कामना की. पूजा के दौरान महिलाओं ने नए परिधान धारण किए और सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना में भाग लिया था. घरों में पारंपरिक पकवानों की सुगंध फैली रही और पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल देखने को मिला. आचार्य राधेश्याम त्रिपाठी ने बताया कि भैया दूज पर्व के साथ ही अब शादी-विवाह की शुभ लगन की शुरुआत भी हो गयी है. घर-घर में लड़का, लड़की देखने, पुजाई, विवाह की तैयारियां आरंभ हो जाएगी. यह पर्व न केवल भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक बना, बल्कि समाज में खुशहाली और नए शुभारंभ की भी सौगात लेकर आता है. सुरक्षा व्यवस्था को लेकर इंस्पेक्टर दीपक कुमार के नेतृत्व में पुलिस अधिकारी व जवान अलर्ट मोड में दिखे. वाल्मीकिनगर प्रतिनिधि के अनुसार. स्थानीय थाना क्षेत्र में महिलाओं और युवतियों ने श्रद्धा और भक्ति भाव से भगवान गोवर्धन की पूजा विधि विधान से पूरा किया. गोवर्धन पूजा को लोग अन्नकूट पूजा के नाम से भी जानते हैं. गुरुवार को भक्ति भाव से गोवर्धन पूजा की गयी. इस दिन गोवर्धन पर्वत, गोधन यानी गाय और भगवान श्री कृष्ण की पूजा का विशेष महत्व है. इसके साथ ही वरुण देव, इंद्र देव और अग्नि देव आदि देवताओं की पूजा का भी विधान है. गोवर्धन पूजा में विभिन्न प्रकार के अन्न को समर्पित और वितरित किया जाता है. इसी वजह से इस उत्सव या पर्व का नाम अन्नकूट पड़ा है. इस दिन अनेक प्रकार के पकवान, मिठाई से भगवान को भोग लगाया जाता है. मान्यता है कि गोवर्धन पूजा अन्नकूट या गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से प्रारंभ हुई है. इसमें हिंदू धर्मावलंबी घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन नाथ जी की अल्पना बनाकर उनका पूजन करते है. उसके बाद गिरिराज भगवान (पर्वत) को प्रसन्न करने के लिए उन्हें अन्नकूट का भोग लगाया जाता है. इस दिन मंदिरों में अन्नकूट किया जाता है.

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Author: SATISH KUMAR

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