Kanwar Yatra 2026: सावन की पहली सोमवारी पर वाल्मीकिनगर के नारायणी तट पर उस समय श्रद्धालुओं की नजरें एक अनोखी कांवड़ यात्रा पर टिक गईं, जब बगहा के छत्रोंल निवासी 20 वर्षीय फिट धर्मेंद्र अपनी छह सदस्यीय टीम के साथ 111 लीटर नारायणी जल लेकर शिवधाम के लिए रवाना हुए. इस यात्रा की सबसे खास बात उनके साथ चल रहे तीन पालतू कुत्ते रहे, जिन्होंने पूरे रास्ते श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींचा.
श्रद्धालु जगह-जगह रुककर इस अनोखे दृश्य की तस्वीरें और वीडियो बनाते नजर आए.
कुत्तों के कंधों पर सजे थे छोटे रथ
तीनों पालतू कुत्तों के कंधों पर झंडों से सजे छोटे-छोटे रथ बांधे गए थे. उनके पैरों में बंधे घुंघरुओं की मधुर छनक यात्रा के दौरान लोगों को आकर्षित करती रही.
"हर-हर महादेव" और "बोल बम" के जयघोष के बीच यह अनूठी कांवड़ यात्रा श्रद्धा और कौतूहल का केंद्र बनी रही.
एक महीने तक कराया गया विशेष प्रशिक्षण
धर्मेंद्र के साथी सागर और सितंबर ने बताया कि तीनों कुत्ते पूरी तरह प्रशिक्षित हैं. उन्हें पिछले एक महीने से इस धार्मिक यात्रा के लिए विशेष अभ्यास कराया गया था.
उन्होंने बताया कि ये कुत्ते धर्मेंद्र से बेहद जुड़े हुए हैं और उनके बिना नहीं रह पाते. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद पहली बार उन्हें कांवड़ यात्रा में शामिल किया गया.
श्रद्धालुओं ने बताया आस्था और अपनापन का प्रतीक
यात्रा के दौरान कई श्रद्धालुओं ने इसे इंसान और पशु के बीच गहरे लगाव तथा आस्था का अनोखा उदाहरण बताया.
कुछ श्रद्धालुओं ने भावुक होकर कहा कि सावन के पावन महीने में भगवान शिव की यात्रा का हिस्सा बनना इन जीवों के लिए भी सौभाग्य की बात है.
पूरे रास्ते बना रहा आकर्षण
वाल्मीकिनगर से शिवधाम की ओर बढ़ती यह अनोखी कांवड़ यात्रा पूरे मार्ग में चर्चा का विषय बनी रही. श्रद्धालु लगातार इस अनूठे दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते रहे और यात्रा श्रद्धा के साथ-साथ आकर्षण का भी केंद्र बनी रही.
