वाल्मीकिनगर में फ्रांस के परिवार ने जानी थारू संस्कृति, झमटा-झरका नृत्य और पारंपरिक व्यंजनों का लिया आनंद

फ्रांस के एक परिवार ने वाल्मीकिनगर की यात्रा कर थारू आदिवासी संस्कृति को करीब से जाना. उन्होंने पारंपरिक झमटा-झरका नृत्य का आनंद लिया और स्वादिष्ट थारू व्यंजनों का स्वाद चखा.

Valmikinagar News: वाल्मीकिनगर की प्राकृतिक सुंदरता के साथ यहां की समृद्ध थारू आदिवासी संस्कृति भी विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर रही है. बुधवार को फ्रांस निवासी कैमलिन ग्रेगिया अपने कोलंबिया में कार्यरत बिहारी पति पंकज झा और 10 वर्षीय बेटी चंद्रिका कैमलिन झा के साथ वाल्मीकिनगर पहुंचीं. पर्यटन सत्र समाप्त होने के कारण परिवार जंगल सफारी का आनंद नहीं ले सका, लेकिन धार्मिक स्थलों और प्राकृतिक क्षेत्र का भ्रमण कर यहां की संस्कृति को करीब से जाना.

सावन में जटाशंकर और कालेश्वर मंदिर में किया जलाभिषेक

हिंदू धर्म में आस्था रखने वाली कैमलिन ग्रेगिया ने सावन के पवित्र महीने में वाल्मीकिनगर स्थित जटाशंकर और कालेश्वर मंदिर में जलाभिषेक कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की. परिवार ने धार्मिक स्थलों का भ्रमण कर क्षेत्र की आध्यात्मिक और प्राकृतिक विशेषताओं को भी करीब से देखा.

थारू होम स्टे में हुआ विदेशी मेहमानों का स्वागत

इसके बाद परिवार संतपुर स्थित थारू होम स्टे पहुंचा. ईको विकास समिति के अध्यक्ष संतोष काजी के नेतृत्व में वन विभाग के सहयोग से संचालित इस होम स्टे में विदेशी मेहमानों का पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया गया. आदिवासी महिलाओं ने तिलक लगाकर अतिथियों का अभिनंदन किया.

झमटा और झरका नृत्य ने मोहा मन

स्वागत के बाद थारू संस्कृति से जुड़े झमटा और झरका नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई. पारंपरिक परिधान में महिलाओं के लोकनृत्य और संगीत ने विदेशी मेहमानों को खासा प्रभावित किया. परिवार के सदस्यों ने भी नृत्य-संगीत में सहभागिता कर ग्रामीण संस्कृति का आनंद लिया.

पारंपरिक व्यंजनों का चखा स्वाद

होम स्टे में परिवार ने थारू समुदाय के पारंपरिक व्यंजन पेठा और चेंची का स्वाद भी चखा. पंकज झा ने कहा कि उन्होंने वाल्मीकिनगर के बारे में जितना सुना था, उससे कहीं अधिक यहां देखने और अनुभव करने को मिला. उन्होंने स्थानीय लोगों के अपनापन को सबसे अधिक प्रभावित करने वाला अनुभव बताया.

विदेशी परिवार ने बताया यादगार अनुभव

परिवार ने अपनी यात्रा को यादगार बताते हुए कहा कि वाल्मीकिनगर की प्रकृति, धार्मिक आस्था और थारू संस्कृति का अनुभव उनके लिए खास रहा. परिवार ने अपने अनुभव को "दिस इज द मेमोरेबल फॉर अस" बताते हुए कहा कि यह यात्रा हमेशा उनकी यादों में रहेगी.

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By Prabhat khabar news desk

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