वीटीआर में वन व वन्यजीव सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया फॉरेस्ट वन पथ

सर्दियों के आगमन के साथ वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा देने के लिए वन विभाग ने ‘फॉरेस्ट वन पथ’ की मरम्मति पूरी कर ली है.

हरनाटांड़. सर्दियों के आगमन के साथ वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा देने के लिए वन विभाग ने ‘फॉरेस्ट वन पथ’ की मरम्मति पूरी कर ली है. यह विशेष पथ जंगल के प्रमुख हिस्सों को जोड़ते हुए इस तरह विकसित किया गया है कि गश्ती दल वन क्षेत्र में आसानी से आवाजाही कर सके और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई संभव हो सके. वन प्रमंडल 2 के मदनपुर वन प्रक्षेत्र अंतर्गत तीन वन परिसर के जंगल में वन सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ किया गया है. घने जंगलों में वन विभाग द्वारा कई अलग-अलग करीब 34 किलोमीटर वन पथ (फॉरेस्ट ट्रैक) तैयार किए गए हैं. ताकि गश्ती दल की आवाजाही आसान हो सके और संवेदनशील जगलों व वन्यजीवों की निगरानी आसानी से किया जा सके. सर्द मौसम में जंगलों में अवैध कटान, शिकार और चराई की गतिविधियों में बढ़ोतरी की आशंका रहती है. ऐसे में लगातार गश्ती और चौकसी बढ़ाना जरूरी हो जाता है. इसको ध्यान में रखते हुए विभाग ने गश्ती दलों की तैनाती बढ़ाई है तथा रात्रिकालीन निगरानी को भी सख्ती से लागू किया गया है. मदनपुर वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी नसीम अंसारी ने बताया कि मदनपुर वन प्रक्षेत्र के जंगल में अलग-अलग करीब 34 किलोमीटर वन पथ तैयार किया गया है. जिसकी वजह से गश्ती दल अब दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्र तक आसानी से पहुंच पाएंगे हैं. इससे किसी भी तरह की अवैध गतिविधि की सूचना पर तुरंत कार्रवाई संभव हो सकेगी. साथ ही जंगल में लगने वाली आग, वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने में भी यह पहल सहायक साबित होगी. इससे न केवल बाघ, तेंदुआ तथा अन्य वन्यजीवों की निगरानी मजबूत होगी, बल्कि शिकार और अवैध गतिविधियों पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा. पथ के किनारों पर चिन्हांकन और सौर ऊर्जा आधारित संकेतक लगाए गए हैं, जिनसे रात्रि गश्ती व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. विभाग का मानना है कि इस पहल से वनकर्मियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और जंगल का संवेदनशील क्षेत्र लगातार निगरानी में रहेगा. वन विभाग ने स्थानीय लोगों से भी अपील किया है कि संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत सूचित करें, ताकि जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

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Author: SATISH KUMAR

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