Murder Case Bagaha: बगहा के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने वर्ष 2020 के एक हत्या मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस अनुसंधान में गंभीर लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है. अदालत ने पाया कि मृतका रीना देवी की विसरा जांच से जुड़ी एफएसएल रिपोर्ट अब तक न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की गई है.
अदालत ने कहा कि वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट के अभाव में मृत्यु के वास्तविक कारण पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा. इससे अभियुक्त को अनुचित लाभ मिलने की संभावना भी बन सकती है.
2024 में रिपोर्ट भेजने की जानकारी, फिर भी कोर्ट में नहीं हुई पेश
सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि वर्ष 2020 के इस पुराने मामले में लगभग सभी साक्ष्य उपलब्ध हैं, लेकिन एफएसएल रिपोर्ट अब तक रिकॉर्ड पर नहीं लाई गई.
न्यायालय के अनुसार, विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल), मुजफ्फरपुर ने यह जानकारी दी है कि रिपोर्ट वर्ष 2024 में ही पुलिस को भेज दी गई थी, इसके बावजूद उसे न्यायालय में दाखिल नहीं किया गया.
एसपी को दिया जांच का आदेश
मामले को गंभीर मानते हुए अदालत ने आदेश की प्रति बगहा पुलिस अधीक्षक (एसपी) को भेजी है.
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मामले की जांच कर 5 अगस्त 2026 तक एफएसएल रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत कराई जाए. साथ ही यह भी बताया जाए कि रिपोर्ट पेश करने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई.
डीआईजी बेतिया को भी भेजी गई आदेश की प्रति
अदालत ने आदेश की एक प्रति पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी), बेतिया को भी भेजी है.
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि हत्या जैसे गंभीर मामलों में पुलिस की जांच प्रक्रिया की प्रभावी निगरानी आवश्यक है, ताकि महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य समय पर अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जा सकें.
अब 5 अगस्त पर रहेगी नजर
फिलहाल अदालत ने पुलिस प्रशासन से निर्धारित समय सीमा के भीतर एफएसएल रिपोर्ट उपलब्ध कराने और जांच में हुई लापरवाही पर की गई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी मांगी है. अब इस मामले में अगली सुनवाई से पहले पुलिस की ओर से अदालत के निर्देशों के अनुपालन पर नजर रहेगी.
