Madhubani News: प्रखंड के चन्द्रौटा गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महायज्ञ में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया. कथा के दौरान परम पूज्य जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य जी महाराज ने श्रद्धालुओं को आत्मज्ञान, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया.
उन्होंने कहा कि मनुष्य का शरीर नश्वर है, जबकि आत्मा अजर, अमर और अविनाशी है. इसलिए जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक सुख-सुविधाएं जुटाना नहीं, बल्कि अपने वास्तविक स्वरूप का बोध करना होना चाहिए.
धर्म, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने की सीख
कथा के दौरान जगद्गुरु राघवाचार्य महाराज ने कहा कि मानव जीवन तभी सार्थक बनता है, जब व्यक्ति सत्य, करुणा, धर्म और आत्मज्ञान को अपने जीवन में उतारता है.
उन्होंने श्रद्धालुओं से आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने और मानव कल्याण के लिए कार्य करने का आह्वान किया.
श्रीमद्भागवत कथा जीवन को देती है सकारात्मक दिशा
राजकीयकृत हरदेव प्रसाद इंटरमीडिएट कॉलेज के पूर्व प्राचार्य पंडित भरत उपाध्याय ने बताया कि उन्हें अपने पूर्व प्रधानाचार्य पंडित सुधाकर मिश्र के निवास स्थान चन्द्रौटा में आयोजित इस पावन कथा का श्रवण करने का अवसर मिला.
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा व्यक्ति को सत्य, प्रेम, सेवा और परिश्रम को जीवन का मूल मंत्र बनाने की प्रेरणा देती है तथा जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करती है.
गीता के उपदेशों का भी किया उल्लेख
कथा के दौरान जगद्गुरु राघवाचार्य महाराज ने भगवद्गीता के उपदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि मानव जीवन का प्रत्येक क्षण अमूल्य है.
उन्होंने कहा कि समय का सदुपयोग मानव कल्याण और समाज की सेवा में होना चाहिए.
बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
इस अवसर पर डॉ. वेद प्रकाश मिश्र, प्रधानाचार्या श्रीमती संगीता मिश्रा, रजनीकांत मिश्र, दिनेश कुमार गुप्ता, डॉ. बालमुकुंद मिश्र, महेश मिश्र, चितरंजन तिवारी और दिनेश पति त्रिपाठी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे.
कथा महायज्ञ में आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आध्यात्मिक प्रवचन का श्रवण किया.
