सिमरियाधाम में हरे रामा-हरे कृष्णा के जयकारे से गूंज उठे मां गंगा के तट

आदि कुंभस्थली सिमरियाधाम में मां गंगा के पावन तट पर सर्वमंगला के अधिष्ठाता स्वामी चिदात्मनजी महाराज के सान्निध्य में अखिल भारतीय सर्वमंगला परिवार के द्वारा आयोजित कल्पवास पर्यंत क्षेत्र की महत्वपूर्ण तीसरी व अंतिम परिक्रमा शांतिपूर्वक संपन्न हुई.

बीहट. आदि कुंभस्थली सिमरियाधाम में मां गंगा के पावन तट पर सर्वमंगला के अधिष्ठाता स्वामी चिदात्मनजी महाराज के सान्निध्य में अखिल भारतीय सर्वमंगला परिवार के द्वारा आयोजित कल्पवास पर्यंत क्षेत्र की महत्वपूर्ण तीसरी व अंतिम परिक्रमा शांतिपूर्वक संपन्न हुई. कार्तिक शुक्ल पक्ष त्रयोदशी के दिन संस्कृति से समन्वय स्थापित करता तीसरी परिक्रमा के अवसर पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ धर्म, संस्कृति व परंपरा के उत्थान की साक्षी बना. गाजे-बाजे और ऊंट-घोड़े के साथ सिद्धाश्रम के ज्ञानमंच परिसर से निकले इस परिक्रमा जुलूस में शामिल महिला,पुरूष व बच्चों का हुजूम सोमवार को सिमरियाधाम में उमड़ पड़ा.जय राम हरे जय कृष्ण हरे,जय मिथिला सिमरिया धाम हरे को भजते श्रद्धालुओं को देखने के लिये परिक्रमा पथ के दोनों ओर खड़े लोग विस्मित हो रहे थे. परिक्रमा शांतिपूर्वक समाप्ति के पश्चात उन्होंने बिहार सरकार के साथ जिला प्रशासन, मेला प्रशासन, सर्वमंगला के पीठाधीश्वर, सर्वमंगला योग अध्यात्म पीठ के पदाधिकारियों के साथ परिक्रमा में शामिल सभी श्रद्धालुओं को सहयोग के लिए साधुवाद दिया.

वर्तमान कालखंड सिमरियाधाम के पुनर्निमाण के लिए जाना जायेगा : स्वामी चिदात्मनजी महाराज

भारतीय संस्कृति एवं युग धर्म के प्रति सचेत स्वामी चिदात्मनजी ने परिक्रमा के उपरांत कहा कि वर्तमान कालखंड सिमरियाधाम के पुनर्निमाण के लिए जाना जायेगा. सिमरिया व्यवस्थित हो रहा है और आने वाले दिनों में सड़क सहित रामघाट,अमृत कुंड और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हो जायेगी. जिस तरह से सरकार के द्वारा शासन-प्रशासन की मदद से सिमरियाधाम को सजाया और संवारा जा रहा है,निश्चित रूप से आने वाले दिनों में भारत की एकता व अखंडता के साथ-साथ भारत के सर्वांगीण विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान देगा. उन्होंने कहा कि परिक्रमा से कायिक, वाचिक, मानसिक,सांसर्गिक पाप,ताप से मुक्ति एवं चतुवर्ग फल की प्राप्ति होती है. उन्होंने कहा आदि कुंमस्थली सिमरिया वैदिक युग से ही प्रसिद्ध है. उसके तट पर स्नान,ध्यान और कल्पवास करने वाले लोगों के सौभाग्य का वर्णन भला कौन कर सकता है. आज उन्होंने सिमरिया घाट और सिमरिया धाम के महत्व की विवेचना करते हुए दोनों के बीच के अंतर को समझाया. कहा कि सिमरिया में दो प्रकार के लोग स्नान करने आते हैं.जो अंत्येष्टि के उपरांत सिमरिया घाट में स्नान करते हैं, उन्हें एक स्नान का ही फल मिलता है.लेकिन सिमरियाधाम में स्नान करने का फल सहस्त्र गुणा बढ़ जाता है.घाट पर स्नान करने वाले अपना व पितरों के साथ संतानों का संस्कार क्षीण कर लेते हैं. वहीं सिमरियाधाम में स्नान करने जो आते हैं उनके सारे पूर्वजों का उद्धार होता है.जो भी पुण्यात्मा इसका महत्व समझते हैं उनका जीवन सब प्रकार से धन्य-धान्य से परिपूर्ण हो जाता है. मौके पर रविंद्र ब्रह्मचारी, मीडिया प्रभारी नीलमणि, सुरेंद्र चौधरी, प्रो विजय झा, प्रो प्रेम झा, नवीन सिंह, सुशील चौधरी, सुधीर चौधरी, कौशलेंद्र कुमार, अमरेंद्र कुमार, सुदर्शन सिंह, निपेन्द्र सिंह, तरुण सिंह,पप्पू सिंह, अरविंद चौधरी, विपिन कुमार, राजकुमार चौधरी, राधेश्याम चौधरी, आचार्य नारायण झा, दिनेश झा,राजेश झा, रमेश झा, वरुण झा, सदानंद झा,श्याम झा, राजा झा, राम झा, लक्ष्मण झा,मधुसूदन मिश्र,हरिनाथ मिश्र, शैलेंद्र सिंह, संतोष कुमार आदि मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Manish kumar

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >