बेगूसराय मंसूरचक शारीरिक शिक्षा स्वास्थ्य अनुदेशक प्रिंस कुमार, रौशन राय, देवानंद, सोनू झा, अमन कुमार, शशि कुमार, चंदन कुमार, सुजीत कुमार, गोपाल कुमार सहित अन्य ने बिहार सरकार के गन्ना मंत्री संजय कुमार को एक मांग पत्र सौंपा है. ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने कहा कि शारीरिक शिक्षा स्वास्थ्य अनुदेशकों ने बीपीएड (B.P.Ed) और एमपीएड (M.P.Ed) की डिग्री प्राप्त करने तथा एसटीईटी (STET) परीक्षा पास करने के बाद बिहार के विभिन्न जिलों में शिक्षक नियोजन इकाई के माध्यम से 60 वर्षों के लिए अंशकालिक रूप से विभिन्न स्कूलों में पदस्थापन प्राप्त किया है.
जबकि पंचायत, प्रखंड, जिला और राज्य स्तर पर खेल-कूद के माध्यम से बच्चों के भविष्य को संवारने की मुख्य जिम्मेदारी इन शारीरिक शिक्षा स्वास्थ्य अनुदेशकों के कंधों पर है. इस जिम्मेदारी का वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निर्वहन कर रहे हैं.
अंशकालिक सेवा और कम मानदेय को लेकर जताई चिंता
अनुदेशकों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्व से बहाल शारीरिक शिक्षकों की तुलना में अधिक शैक्षणिक और पेशेवर अर्हता रखने के बावजूद शारीरिक शिक्षा स्वास्थ्य अनुदेशक अंशकालिक रूप से काम करने को विवश हैं.
वे केवल नियमावली में अंशकालिक हैं, जबकि खेल प्रतियोगिताओं और अन्य गतिविधियों में उनकी ड्यूटी फुल-टाइम ली जाती है. इसके एवज में उन्हें बहुत ही कम वेतन (मानदेय) मिलता है, जिसकी चर्चा करने में भी उन्हें संकोच होता है.
मंत्री से पूर्णकालिक सेवा और उचित वेतन की गुहार
शारीरिक शिक्षा स्वास्थ्य अनुदेशक संघ ने गन्ना मंत्री संजय कुमार से पुरजोर गुहार लगाते हुए कहा है कि पूर्व से बहाल शारीरिक शिक्षकों के अनुरूप ही शारीरिक शिक्षा स्वास्थ्य अनुदेशकों की सेवा को भी पूर्णकालिक करवाया जाए.
संघ ने मांग की है कि यदि सरकार उनकी सेवा को पूर्णकालिक कर देती है, तो आने वाले दिनों में सभी अनुदेशक खुशहाली की जिंदगी जीते हुए बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में अपनी पूरी ऊर्जा लगाकर और अधिक लगन से काम कर सकेंगे. मंत्री को ज्ञापन सौंपने के दौरान शारीरिक शिक्षा स्वास्थ्य अनुदेशक संघ के कई प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित रहे.
