बेगूसराय: भारद्वाज गुरुकुल के मल्टी पर्पस हॉल में 'स्पिक मके' के सहयोग से विश्वप्रसिद्ध सात्विक वीणा के जनक तंत्री सम्राट पंडित सलिल भट्ट की शानदार प्रस्तुति का आयोजन किया गया. पंडित सलिल भट्ट ग्रैमी अवॉर्ड विजेता और मोहन वीणा के जनक पद्म भूषण पंडित विश्व मोहन भट्ट के सुपुत्र हैं. कार्यक्रम में तबले पर डिब्रूगढ़ के कौशिक कोंवर ने उनके साथ जुगलबंदी की.
राग परमेश्वरी से शुरुआत और वीणा के इतिहास की जानकारी
कार्यक्रम की शुरुआत भारत रत्न पंडित रवि शंकर द्वारा रचित राग परमेश्वरी की प्रस्तुति से हुई. इस दौरान पंडित सलिल भट्ट ने छात्रों को वीणा परिवार के विभिन्न रूपों से अवगत कराया:
- इकतारा: एक तार वाली पारंपरिक वीणा.
- धनुष वीणा: चार तारों वाली वीणा, जिसे आज वायलिन का रूप माना जाता है.
- कश्यप वीणा: छह तारों वाली वीणा (गिटार इसी का विस्तारित रूप है, जो अब विलुप्ति की कगार पर है).
- शत तंत्री वीणा: इसमें पूरे 100 तार होते हैं.
- रुद्र वीणा और सरस्वती वीणा: रुद्र वीणा की रचना रावण ने की थी, जबकि मां सरस्वती के हाथ में सरस्वती वीणा शोभित होती है.
कारगिल शहीद कैप्टन अमित भारद्वाज को श्रद्धांजलि
पंडित सलिल भट्ट ने कारगिल युद्ध में अपना बलिदान देने वाले अपने सहपाठी कैप्टन अमित भारद्वाज को संगीत के माध्यम से भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी. इसके साथ ही राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर इसकी विशेष प्रस्तुति देकर पूरे माहौल में देशभक्ति का संचार कर दिया.
कार्यक्रम का शुभारंभ व अतिथियों का स्वागत गुरुकुल के निदेशक शिवप्रकाश भारद्वाज ने किया. इस अवसर पर दीनानाथ सुमित्र, अशोक कुमार सिन्हा, विश्वजीत कुमार, सौद असलह, संजीव कुमार, जवाहर लाल भारद्वाज, ओम प्रकाश भारद्वाज सहित विद्यालय परिवार के सदस्य और सैकड़ों बच्चे मौजूद रहे.
