एनएच-31 के किनारे निजी क्लिनिकों के अस्थायी ढांचों पर चला बुलडोजर

शहर में बुधवार को भी ट्रैफिक चौक से दक्षिण पूर्वी हिस्से व लोहिया गुमटी के पूर्वी भाग में एनएच-31 के किनारे बसे पोखरिया क्षेत्र के झोंपड़पट्टी पर जिला प्रशासन व नगर निगम प्रशासन की टीम द्वारा अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया.

बेगूसराय. शहर में बुधवार को भी ट्रैफिक चौक से दक्षिण पूर्वी हिस्से व लोहिया गुमटी के पूर्वी भाग में एनएच-31 के किनारे बसे पोखरिया क्षेत्र के झोंपड़पट्टी पर जिला प्रशासन व नगर निगम प्रशासन की टीम द्वारा अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया. एक बुलडोजर लोहिया नगर गुमटी के पूर्वी भाग एनएच-31 के किनारे झोपड़पट्टी पर चल रहा था तो वहीं एक बुलडोजर ट्रैफिक चौक से दक्षिण पूर्वी हिस्से में बसे निजि अस्पतालों द्वारा एनएचएआइ के भूभागों को अतिक्रमण कर लिये गये अस्थायी ढांचें पर चल रहा था. प्रशासन की इस कार्रवाई से हड़कंप मचा रहा. इस दौरान एनएच-31 सड़क के मध्य से नाप लेकर अवैध अस्थायी निर्मित ईंट व एस्बेस्टस-चदरे की छत बाले ढांचे पर बुलडोजर द्वारा कार्रवाई की जा रही थी. इस दौरान कई चर्चित क्लिनिक व निजि अस्पताल के आगे बने अवैध ढांचा को तोड़ा गया. निजी क्लिनिक वाले अपने क्लिनिक के आगे एनएच-31 की जमीन पर जेरनेटर कक्ष व कुछ सीढियां व आगे चाय नाश्ता का एस्बेस्टस की दुकानें बनी हुई थी. जिसपर बुलडोजर चलवा कर जमींदोज कर दी गयी. इधर झोपड़पट्टी में बुलडोजर चलाने की कार्यवाही के दौरान लगभग चार उजड़े हुए झोपड़ी से देश शराब महुआ शराब बनाने की सामग्री भी पकड़ी गयी. जिसको लेकर नगर थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार ने बताया फ्लाइओवर के नीचे स्थित चार झुग्गियों में हुई कार्रवाई में चार हजार जावा महुआ विनिष्ट किया गया. वहीं शराब बनाने के अन्य उपकरण जब्त किया गया है. अर्द्धनिर्मित शराब के गैलन झाड़ियों में छिपा कर रखे गये थे. इस संबंध में अलग से प्राथमिकी अंकित कर कार्रवाई की जायेगी.

अपने उजड़े हुए आशियाने से घरेलू सामान को दिनभर ढोते रहे लोग

एनएच-31 के किनारे पोखरिया क्षेत्र में बसे लोग दिन भर अपने उजड़े हुए आशियाने से घरेलू समानों को छोटे वाहन,ठेला, इ-रिक्शा आदि पर ढोते रहे. विदित हो कि उक्त क्षेत्र में लगभग पचास वर्षों से अधिक समय से झोपड़पट्टी बसा हुआ. 500 से अधिक परिवार उक्त क्षेत्र में बसे हुए थे.जिनमें लगभग 100 से अधिक की संख्या में भूमिहीन परिवार बसे हुए थे.बाकि कुछ वैसे परिवार थे. जिनके आसपास के मोहल्ले में पैतृक आवास तो था परंतु समय के साथ परिवार बढ़ने से घर छोटा पर जाने के कारण सरकारी जमीन पर अपने बसेरा बना लिया था. झोपड़पट्टी पर बुलडोजर चल जाने के बाद वैसे लोग जिनके ठिकाने थे अपने ठिकाने पर पलायन कर गये.वही जो गरीब भूमिहीन थे. दिनभर अपने परिवार के लिए नया बसेरा ढूंढते नजर आये. वहीं कुछ भूमिहीन गरीब लोग कुछ सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ताओं के पास चक्कर लगाते हुए देखे गये.

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By Manish kumar

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