Begusarai News: बेगूसराय के मंझौल अनुमंडल क्षेत्र में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. मेहदा शाहपुर पंचायत के बसौना घाट और धर्मपुर गांव में लाखों रुपये की लागत से बनाये गये दो सरकारी नलकूप पिछले करीब तीन वर्षों से चालू नहीं हो सके हैं. नवनिर्मित नलकूपों से पानी नहीं निकलने के कारण किसान खेतों की सिंचाई के लिए परेशान हैं.
स्थानीय ग्रामीणों ने नलकूपों के निर्माण और संचालन में अनियमितता तथा विभागीय लापरवाही का आरोप लगाया है. ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी राशि खर्च होने के बावजूद किसानों को सिंचाई की सुविधा नहीं मिल पा रही है.
नया नलकूप बना, 100 मीटर दूर पुराना भी पड़ा है बंद
ग्रामीणों के अनुसार, बसौना घाट में जहां नया सरकारी नलकूप बनाया गया है, वहां से महज करीब 100 मीटर की दूरी पर पहले से एक सरकारी नलकूप मौजूद है. पुराना नलकूप पिछले कई वर्षों से मरम्मत के अभाव में बंद पड़ा है.
ग्रामीणों का सवाल है कि पुराने नलकूप की मरम्मत कर उसे चालू कराने के बजाय उसी के आसपास नया नलकूप क्यों बनाया गया. नया नलकूप भी चालू नहीं होने से विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं.
योजना का शिलापट्ट तक नहीं लगाया गया
ग्रामीणों ने बताया कि नलकूप निर्माण स्थल पर अब तक योजना का शिलापट्ट नहीं लगाया गया है. शिलापट्ट नहीं होने के कारण योजना की लागत, संबंधित विभाग और संवेदक की जानकारी भी सार्वजनिक नहीं है.
ग्रामीणों का आरोप है कि बिना शिलापट्ट लगाये ही योजना को पूरा दिखाने की कोशिश की गयी है. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
कहीं मोटर तो कहीं बिजली कनेक्शन की समस्या
ग्रामीणों के मुताबिक, योजना के तहत बोरिंग, मोटर, स्टार्टर, पाइपलाइन और विद्युत कनेक्शन के नाम पर राशि खर्च की गयी, लेकिन धरातल पर नलकूप से पानी नहीं निकल रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि कहीं मोटर नहीं लगी है, तो कहीं बिजली कनेक्शन नहीं है. कुछ स्थानों पर पाइपलाइन का काम भी अधूरा होने का आरोप लगाया गया है.
रबी फसल में सिंचाई के लिए निजी नलकूप पर निर्भर किसान
शाहपुर पंचायत के पूर्व मुखिया निरंजन कुमार, ग्रामीण सुबोध कुमार, रामदेव सिंह, रामविलास पासवान समेत कई किसानों ने बताया कि रबी फसल के समय सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है. ऐसे में किसानों को निजी नलकूपों का सहारा लेना पड़ता है और इसके लिए अधिक राशि खर्च करनी पड़ती है.
किसानों का कहना है कि यदि सरकारी नलकूप समय पर चालू नहीं हुए तो इस साल भी रबी फसल की सिंचाई में परेशानी हो सकती है.
उच्चस्तरीय जांच की मांग
आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी, बेगूसराय और लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है. ग्रामीणों ने दोषी अभियंता और संवेदक पर कार्रवाई के साथ दोनों नलकूपों को अविलंब चालू कराने की मांग की है.
पूर्व मुखिया निरंजन सिंह ने कहा कि सरकार किसानों के लिए योजनाएं बनाती है, लेकिन धरातल पर काम नहीं होने से उनका लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पाता. उन्होंने बसौना घाट और धर्मपुर के नलकूपों को इसका उदाहरण बताया.
फिलहाल लाखों रुपये की लागत से बने दोनों नलकूपों के चालू नहीं होने से किसानों को सिंचाई के लिए निजी संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है.
