Begusarai Flood Situation : बेगूसराय समाहरणालय स्थित कारगिल विजय सभा भवन में जिला पदाधिकारी रिची पांडेय द्वारा जिले में बाढ़ की वर्तमान स्थिति, राहत एवं बचाव कार्यों तथा प्रशासन द्वारा की जा रही तैयारियों को लेकर प्रेस वार्ता आयोजित की गई.
इस दौरान जिला पदाधिकारी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की अद्यतन स्थिति, नाव परिचालन, सामुदायिक रसोई, स्वास्थ्य सेवाओं, पशुधन सुरक्षा, तटबंधों की निगरानी सहित अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी दी.
गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के पार, अलर्ट मोड में प्रशासन
डीएम ने बताया कि जिले में वर्तमान में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है तथा जलस्तर बढ़ा हुआ है. दोपहर 12 बजे प्राप्त आंकड़ों के अनुसार गंगा नदी का जलस्तर 43.51 मीटर दर्ज किया गया. जबकि खतरे का निशान 41.76 मीटर है. उच्चतम बाढ़ स्तर 43.52 मीटर है. ऐसी स्थिति में जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है.
सभी संबंधित पदाधिकारियों द्वारा लगातार क्षेत्र में निगरानी की जा रही है. जनप्रतिनिधियों एवं आम लोगों से भी लगातार संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली जा रही है, ताकि बाढ़ प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा सके.
8 प्रखंडों के 189 गांव प्रभावित, बचाव में NDRF व SDRF तैनात
वर्तमान में जिले के 08 प्रखंडों की 39 पंचायतें, जिनमें 37 ग्राम पंचायतें एवं 2 नगर क्षेत्र शामिल हैं, बाढ़ से प्रभावित हैं. कुल 189 गांवों के 95,245 परिवार, अर्थात लगभग 3 लाख 80 हजार 900 की आबादी प्रभावित हुई है. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन एवं राहत कार्यों के लिए जिले में उपलब्ध 260 नावों में से वर्तमान में 223 नावों का परिचालन किया जा रहा है.
जिसमें 13 सरकारी एवं 210 निजी नावें शामिल हैं. आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त नावों की व्यवस्था की जाएगी. नाव परिचालन के दौरान सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने तथा किसी भी परिस्थिति में ओवरलोडिंग नहीं करने का निर्देश दिया गया है. सरकारी नावों पर प्रशासन का बैनर लगाया गया है, ताकि बाढ़ प्रभावित लोगों को यह स्पष्ट रूप से पता चल सके कि यह सेवा पूर्णतः निःशुल्क है.
बचाव कार्यों को और प्रभावी बनाने के लिए एसडीआरएफ की टीम को बछवाड़ा, तेघड़ा, मटिहानी एवं शाम्हो प्रखंडों में तथा एनडीआरएफ की टीम को बलिया प्रखंड में प्रतिनियुक्त किया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके.
85 सामुदायिक रसोई संचालित, 36 मेडिकल कैंप व राहत सामग्री की व्यवस्था
डीएम ने बताया कि बाढ़ प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए वर्तमान में 85 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां अब तक 28,653 लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है. सभी अनुमंडल पदाधिकारियों एवं अंचलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि जहां भी आम लोगों के घरों में पानी प्रवेश कर गया है, वहां आवश्यकता के अनुसार तत्काल सामुदायिक रसोई शुरू कराई जाए.
सामुदायिक रसोई केंद्रों पर साफ-सफाई, पर्याप्त कुर्सी एवं दरी, हाथ धोने की व्यवस्था तथा पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. पीएचईडी एवं संबंधित विभाग को पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है. जिला पदाधिकारी ने कहा कि वे स्वयं भी सामुदायिक रसोई केंद्रों का निरीक्षण करेंगे.
उन्होंने स्पष्ट किया कि भोजन की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा तथा शिकायत प्राप्त होने पर उसकी जांच कर दोषियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जाएगी. ऐसे वृद्धजन जो सामुदायिक रसोई तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, उनके लिए सूखा राशन उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है.
बाढ़ प्रभावित एवं तटबंधों पर रह रहे परिवारों के लिए पर्याप्त मात्रा में पॉलिथीन शीट उपलब्ध है. जिले में वर्तमान में 41,880 पॉलिथीन शीट का सुरक्षित भंडार उपलब्ध है, जबकि अब तक 1,290 पॉलिथीन शीट का वितरण किया जा चुका है. स्वास्थ्य सुविधाओं के संबंध में जिला पदाधिकारी ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 36 मेडिकल कैंप लगातार संचालित किए जा रहे हैं. अब तक मेडिकल टीमों द्वारा 5,164 मरीजों की जांच एवं उपचार कर उन्हें आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं.
दियारा एवं जलमग्न क्षेत्रों में बोट एम्बुलेंस एवं बोट मेडिकल कैंप के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. जिला प्रशासन के पास पर्याप्त मात्रा में दवाएं उपलब्ध हैं. मुख्यमंत्री के निर्देश के आलोक में सिविल सर्जन को “चिकित्सा आपके द्वार” कार्यक्रम के तहत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं संचालित करने का निर्देश दिया गया है.
साथ ही ब्लीचिंग पाउडर एवं चूना का नियमित छिड़काव तथा फॉगिंग कराने का निर्देश दिया गया है. गर्भवती महिलाओं को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आईसीडीएस एवं स्वास्थ्य विभाग को आपसी समन्वय से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है.
पशुधन सुरक्षा, कृषि क्षति और डीएम की आम लोगों से अपील
पशुधन की सुरक्षा के लिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 08 पशु चिकित्सा कैंप संचालित किए जा रहे हैं. अब तक 840 पशुओं का उपचार एवं टीकाकरण किया गया है तथा पशुपालकों के बीच 345 क्विंटल पशुचारा वितरित किया जा चुका है.
कृषि विभाग से प्राप्त प्रतिवेदन के अनुसार जिले में कुल 27,034 हेक्टेयर कृषि रकबा बाढ़ से प्रभावित हुआ है. पानी उतरने के बाद विस्तृत सर्वेक्षण कराकर फसल क्षति का आकलन किया जाएगा तथा नियमानुसार राहत उपलब्ध कराई जाएगी. तटबंधों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए जिला पदाधिकारी ने कहा कि जिले के सभी तटबंध सुरक्षित हैं.
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जल संसाधन विभाग की पूरी टीम द्वारा तटबंधों की 24 घंटे निगरानी एवं गश्ती की जा रही है. कहीं भी किसी प्रकार के रिसाव या अन्य समस्या की सूचना को प्रशासन गंभीरता से ले रहा है. उन्होंने कहा कि छोटी से छोटी जानकारी को भी गंभीरता से लेते हुए तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है.
जिला पदाधिकारी ने जिलेवासियों से अपील की कि वे धैर्य बनाए रखें, अफवाहों पर ध्यान न दें तथा गहरे पानी वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवागमन से बचें. किसी भी प्रकार की आपात स्थिति अथवा समस्या होने पर तत्काल स्थानीय प्रशासन अथवा जिला आपदा नियंत्रण कक्ष को सूचित करें. जिला प्रशासन बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता एवं सुरक्षा के लिए पूरी तत्परता के साथ कार्य कर रहा है.
