Begusarai News : बखरी अवर निबंधन कार्यालय में कातिबगण एवं मुद्रांक विक्रेता संघ ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी. हड़ताल पर बैठे कातिबों और मुद्रांक विक्रेताओं ने सरकार से पेपरलेस निबंधन व्यवस्था वापस लेकर पहले की तरह पेपर आधारित रजिस्ट्री प्रणाली लागू करने की मांग की.
पेपरलेस व्यवस्था पर उठाए कई सवाल
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि वर्तमान पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था में जमीन से संबंधित विस्तृत जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं हो पाती है. इसके अलावा दस्तावेज पर क्रेता और विक्रेता के हस्ताक्षर नहीं होते तथा दोनों पक्षों के गवाहों के हस्ताक्षर का भी प्रावधान नहीं है. उनका कहना है कि रजिस्ट्री का प्रारूप अंग्रेजी भाषा में होने के कारण आम लोगों को इसे समझने में कठिनाई होती है.
कातिबों ने रोजगार और सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
कातिबों ने आरोप लगाया कि नई व्यवस्था में कातिब और मुद्रांक विक्रेताओं के हस्ताक्षर के लिए भी कोई स्थान नहीं रखा गया है. साथ ही रजिस्ट्री प्रक्रिया के दौरान आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर बार-बार ओटीपी की आवश्यकता पड़ती है. उनका कहना है कि भविष्य में यदि किसी ग्राहक के साथ बैंकिंग धोखाधड़ी होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह स्पष्ट नहीं है.
राजस्व और रोजगार पर असर पड़ने की आशंका
संघ का दावा है कि पेपरलेस प्रणाली से सरकार के राजस्व पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. साथ ही सैकड़ों कातिब और मुद्रांक विक्रेताओं के सामने रोजगार का संकट उत्पन्न हो जाएगा, जिससे उनके परिवारों के भरण-पोषण पर भी असर पड़ेगा. उन्होंने सरकार से व्यवस्था की समीक्षा कर पूर्व की तरह पेपर आधारित निबंधन प्रणाली बहाल करने की मांग की.
बड़ी संख्या में कातिब और मुद्रांक विक्रेता रहे शामिल
हड़ताल में कातिब संघ के सचिव अहमद खान, अध्यक्ष शशिकांत मिश्रा, कोषाध्यक्ष शंभुकांत झा, विपिन कुमार, अरुण कुमार सिंह, रामबदन पंडित, सुखदेव झा, शमीम अख्तर, मनोज यादव, अमरेंद्र प्रसाद सिंह सहित बड़ी संख्या में कातिब एवं मुद्रांक विक्रेता शामिल रहे.
कार्यालय का पक्ष भी आया सामने
इस संबंध में अवर निबंधन कार्यालय के निम्न वर्गीय लिपिक संतोष कुमार शर्मा ने बताया कि बिहार निबंधन अधिनियम-2026 के तहत पेपरलेस निबंधन व्यवस्था लागू की गई है. उन्होंने कहा कि रजिस्ट्री पूरी होने के बाद क्रेता को पीडीएफ फाइल उपलब्ध कराई जाती है. उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में कातिबों या आम नागरिकों की ओर से किसी प्रकार का ऑनलाइन अपॉइंटमेंट नहीं किया जा रहा है.
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