Begusarai Anganwadi Center : सरकारी योजनाओं में बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के दावों के बीच बेगूसराय मंसूरचक प्रखंड के बहरामपुर पंचायत स्थित वार्ड संख्या-5 के आंगनबाड़ी केंद्र की स्थिति इन दावों की हकीकत बयां कर रही है. यह केंद्र एक जर्जर सामुदायिक भवन में संचालित हो रहा है, जिसकी छत की सीलिंग लगातार टूटकर गिर रही है और दीवारें भी काफी क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं. ऐसे में केंद्र पर आने वाले मासूम बच्चों तथा सेविका-सहायिका की सुरक्षा पर हर समय खतरा मंडरा रहा है.
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, भवन की हालत वर्षों से खराब है. कई बार छत का प्लास्टर टूटकर नीचे गिर चुका है, जिससे कभी भी बच्चे बड़े हादसे के शिकार हो सकते हैं. इसके बावजूद केंद्र का संचालन इसी असुरक्षित भवन में किया जा रहा है.
सात वर्षों से अटकी है विभागीय फाइल
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले पांच से सात वर्षों से नए आंगनबाड़ी भवन के निर्माण की मांग लगातार की जा रही है, लेकिन विभागीय फाइलें प्रशासनिक स्तर पर ही अटकी हुई हैं. ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब प्रशासन को भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी लंबे समय से है, तो बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समय रहते नया भवन बनाने की दिशा में ठोस पहल क्यों नहीं की गई.
उनका कहना है कि सरकार बच्चों के पोषण और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुरक्षित भवन जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है.
सीडीपीओ ने वरीय अधिकारियों को भेजा पत्र
इस संबंध में प्रखंड के सीडीपीओ महताब आलम ने बताया कि भवन की अत्यंत जर्जर स्थिति को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर वरीय अधिकारियों को पत्र भेजा गया है. नए भवन के निर्माण के लिए संबंधित विभाग को पहले ही प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक वहां से स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है.
उन्होंने कहा कि विभाग को पुनः स्मार पत्र भेजकर निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर शुरू कराने का आग्रह किया गया है.
तीन बार उठाने पर भी नहीं पहुंचे अधिकारी
वहीं, स्थानीय मुखिया धर्मवीर सिंह कुंदन ने बताया कि इस गंभीर मुद्दे को पंचायत समिति की बैठक में दो नहीं, बल्कि तीन-तीन बार उठाया गया है, लेकिन अब तक कोई अधिकारी स्थल निरीक्षण के लिए भी नहीं पहुंचे. उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा यह मामला बेहद गंभीर है और प्रशासन को इसे प्राथमिकता के आधार पर हल करना चाहिए.
विभागीय फाइलों के भरोसे बच्चों की सुरक्षा
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मासूम बच्चों की सुरक्षा भी सरकारी फाइलों और लंबी विभागीय प्रक्रियाओं के भरोसे ही रहेगी. करोड़ों रुपये के विकास बजट और योजनाओं के दावों के बीच यदि आंगनबाड़ी जैसे महत्वपूर्ण केंद्रों को सुरक्षित भवन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, तो यह न केवल प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है बल्कि बच्चों के भविष्य और उनकी सुरक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही भी है.
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